Section 64 of BNS

Section 64 of BNS in Hindi

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Written by Admin

June 13, 2026

भारतीय न्याय संहिता 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita) ने पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली है, और इसके साथ ही महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े कई प्रावधानों को भी नए सिरे से परिभाषित किया गया है। इन्हीं में से एक है Section 64 of BNS, जो बलात्कार (Rape) जैसे गंभीर अपराध के लिए सजा का प्रावधान करती है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि नए कानून के तहत बलात्कार के दोषी को कितनी सजा हो सकती है, कौन-कौन सी परिस्थितियाँ अपराध को और गंभीर बनाती हैं, और पुराने कानून (IPC धारा 376) से इसकी तुलना कैसे की जाए, तो यह लेख आपके लिए पूरी जानकारी देगा। यहाँ हम धारा 64 को आसान हिंदी भाषा में, उदाहरणों और टेबल के साथ समझाएंगे, जिससे एक सामान्य व्यक्ति भी इसे आसानी से समझ सके।

Section 64 of BNS in Hindi: बलात्कार के लिए सजा

BNS की धारा 64, भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय V का हिस्सा है, जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को कवर किया गया है। यह धारा पहले की IPC धारा 376 की जगह लागू हुई है, और इसमें बलात्कार के अपराध के लिए दो तरह की सजा का प्रावधान है — सामान्य परिस्थितियों के लिए और विशेष/गंभीर परिस्थितियों के लिए।

सरल शब्दों में कहें तो, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ उसकी सहमति के बिना, धोखे से, डर दिखाकर या जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह अपराध बलात्कार की श्रेणी में आता है, और इसके लिए धारा 64 के अंतर्गत सजा दी जाती है।

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बलात्कार के लिए सजा Bharatiya Nyaya Sanhita 2023

Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 के अनुसार, बलात्कार के अपराध के लिए सजा को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा गया है:

प्रावधानसजा की अवधिजुर्माना
उपधारा (1) – सामान्य बलात्संगकम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकता हैहाँ, जुर्माना भी देय होगा
उपधारा (2) – विशेष परिस्थितियाँकम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास, जो दोषी के बचे हुए पूरे प्राकृतिक जीवन तक के आजीवन कारावास तक बढ़ सकता हैहाँ, जुर्माना/पीड़िता को मेडिकल खर्च व पुनर्वास हेतु राशि

यानी सामान्य मामलों की तुलना में, जब अपराध किसी विशेष परिस्थिति में किया जाता है (जैसे पुलिस अधिकारी द्वारा, या लोक सेवक द्वारा), तो सजा और भी अधिक सख्त हो सकती है, और कुछ मामलों में अदालत आजीवन कारावास को “शेष प्राकृतिक जीवन” तक के लिए तय कर सकती है, यानी पैरोल की संभावना भी सीमित हो जाती है।

सरल सारांश (Summary in Hindi)

अगर आप जल्दी में हैं और सिर्फ मुख्य बातें जानना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए पॉइंट्स पर एक नजर डालें:

  • धारा 64, बलात्कार के अपराध के लिए सजा से संबंधित है।
  • यह धारा पुरानी IPC धारा 376 की जगह लागू हुई है।
  • दो उपधाराएं हैं — सामान्य मामलों के लिए (1) और गंभीर/विशेष मामलों के लिए (2)।
  • सामान्य मामलों में सजा 10 साल से आजीवन कारावास तक हो सकती है।
  • विशेष परिस्थितियों (जैसे पुलिस, सशस्त्र बल, जेल कर्मचारी आदि द्वारा अपराध) में सजा और कठोर हो सकती है।
  • सभी मामलों में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  • यह अपराध गैर-जमानती (non-bailable) और संज्ञेय (cognizable) श्रेणी में आता है।

धारा का उद्देश्य:

Section 64 BNS का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करना है। समाज में बलात्कार जैसे अपराध को सबसे गंभीर अपराधों में गिना जाता है, क्योंकि यह न सिर्फ पीड़िता के शरीर पर, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति, आत्मसम्मान और जीवन पर भी गहरा असर डालता है।

इस धारा के माध्यम से कानून यह स्पष्ट संदेश देता है कि:

  1. बलात्कार जैसे अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  2. अगर अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिस पर समाज भरोसा करता है (जैसे पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, सेना का सदस्य), तो सजा और अधिक कठोर होगी।
  3. न्यायालय को यह अधिकार है कि वह परिस्थितियों के अनुसार उचित सजा तय करे, ताकि अपराधी को सख्त संदेश मिल सके।

इस प्रकार, यह धारा सिर्फ दंड देने का प्रावधान नहीं है, बल्कि यह अपराध को रोकने (deterrence) के उद्देश्य से भी बनाई गई है।

(1) सामान्य बलात्संग:

धारा 64 की उपधारा (1) उन सामान्य मामलों पर लागू होती है जो उपधारा (2) में बताई गई विशेष परिस्थितियों के अंतर्गत नहीं आते। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति ने बलात्कार किया है, और यह अपराध किसी विशेष/गंभीर श्रेणी (जैसे पुलिस हिरासत, जेल आदि) में नहीं आता, तो भी सजा हल्की नहीं होगी।

मुख्य बिंदु:

  • सजा की न्यूनतम अवधि 10 वर्ष का कठोर कारावास है।
  • सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकता है।
  • दोषी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो पीड़िता के इलाज और पुनर्वास के खर्च को पूरा करने में मदद कर सकता है।

यहां “कठोर कारावास” (rigorous imprisonment) का मतलब सिर्फ जेल में रहना नहीं, बल्कि उस दौरान कैदी को कठिन शारीरिक श्रम भी करना पड़ सकता है। यह सामान्य कारावास (simple imprisonment) से अलग और अधिक सख्त माना जाता है।

(2) विशेष परिस्थितियाँ (जहाँ अपराध की गंभीरता अधिक मानी जाती है):

उपधारा (2) उन परिस्थितियों को बताती है जिनमें बलात्कार का अपराध और भी गंभीर माना जाता है, और इसलिए इसके लिए सजा भी कठोर होती है। ये परिस्थितियाँ निम्नलिखित हो सकती हैं:

  • पुलिस अधिकारी द्वारा अपराध — अगर कोई पुलिस अधिकारी अपनी ड्यूटी के दौरान, पुलिस थाने की सीमा के भीतर, या किसी महिला की हिरासत में रहते हुए बलात्कार करता है।
  • लोक सेवक (Public Servant) द्वारा अपराध — जब कोई सरकारी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, अपनी अभिरक्षा में रही किसी महिला के साथ यह अपराध करता है।
  • सशस्त्र बलों के सदस्य द्वारा अपराध — केंद्र या राज्य सरकार द्वारा किसी क्षेत्र में तैनात सशस्त्र बल का कोई सदस्य, उस क्षेत्र में बलात्कार करता है।
  • जेल, रिमांड होम या संस्थागत परिसर में अपराध — जेल, रिमांड होम, सुधार गृह, या किसी अन्य संस्था का कर्मचारी, वहाँ रहने वाली किसी महिला के साथ यह अपराध करता है।
  • अस्पताल के कर्मचारी द्वारा अपराध — अस्पताल में काम करने वाला कोई व्यक्ति, अस्पताल परिसर में किसी महिला के साथ बलात्कार करता है।
  • रिश्तेदार, शिक्षक, या भरोसे की स्थिति में मौजूद व्यक्ति द्वारा अपराध — जब अपराधी पीड़िता का रिश्तेदार हो, अभिभावक हो, शिक्षक हो, या किसी प्रकार के भरोसे और अधिकार की स्थिति में हो।
  • गर्भवती महिला के साथ अपराध — यदि अपराधी को यह जानकारी हो कि महिला गर्भवती है, और इस स्थिति में भी अपराध किया जाता है।
  • बार-बार अपराध (Repeat Offender) — पहले भी बलात्कार के अपराध में दोषी पाया गया व्यक्ति, यदि दोबारा यही अपराध करता है।
  • गंभीर शारीरिक चोट या स्थायी विकलांगता पहुँचाना — यदि अपराध के दौरान पीड़िता को गंभीर रूप से चोट पहुँचाई जाती है या वह स्थायी रूप से अक्षम हो जाती है।

इन सभी परिस्थितियों में, सजा कम से कम 10 वर्ष से शुरू होकर, दोषी के शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक के कारावास तक जा सकती है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा।

नीचे एक तुलना तालिका दी गई है, जिससे आपको दोनों उपधाराओं के बीच का अंतर आसानी से समझ में आ जाएगा:

बिंदुउपधारा (1) सामान्य मामलेउपधारा (2) विशेष परिस्थितियाँ
अपराध करने वालाकोई भी व्यक्तिपुलिस, लोक सेवक, सशस्त्र बल, संस्थागत कर्मचारी आदि
न्यूनतम सजा10 वर्ष कठोर कारावास10 वर्ष कठोर कारावास
अधिकतम सजाआजीवन कारावासशेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास
जुर्मानासंभवसंभव, पुनर्वास हेतु भी
गंभीरताअधिकऔर भी अधिक

स्पष्टीकरण:

कानून में कुछ शब्दों का स्पष्ट अर्थ समझना जरूरी है, ताकि कोई भ्रम न रहे:

  • “कठोर कारावास” (Rigorous Imprisonment): इसका मतलब है कि कैदी को जेल में सिर्फ बंद नहीं रखा जाएगा, बल्कि उससे श्रम भी कराया जा सकता है। यह सामान्य कारावास से ज्यादा सख्त सजा है।
  • “आजीवन कारावास” (Life Imprisonment): सामान्य भाषा में इसे “उम्र कैद” कहा जाता है। कानून के अनुसार, आजीवन कारावास का मतलब दोषी के प्राकृतिक जीवन के अंत तक की सजा है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में सरकार के विशेष आदेश से सजा में राहत संभव हो सकती है।
  • “शेष प्राकृतिक जीवन” (Remainder of Natural Life): इस वाक्यांश का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में किया गया है, जहाँ अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि दोषी को अपने पूरे जीवन तक जेल में रहना होगा, बिना किसी समय से पहले रिहाई की संभावना के।
  • “लोक सेवक” (Public Servant): इसमें सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, और किसी भी सरकारी पद पर कार्यरत व्यक्ति शामिल हैं।
  • “अभिरक्षा” (Custody): इसका मतलब है किसी व्यक्ति का कानूनी या प्रशासनिक नियंत्रण में होना, जैसे पुलिस हिरासत, जेल, या किसी संस्था की देखभाल में।

यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि बलात्कार जैसे अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) श्रेणी में आते हैं, यानी पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है, और आरोपी को आसानी से जमानत नहीं मिलती। साथ ही, ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय (Sessions Court) में होती है, और कानून के अनुसार ट्रायल को तेजी से पूरा करने की कोशिश की जाती है।

Conclusion

Section 64 of BNS भारतीय न्याय संहिता 2023 का एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करता है। पुरानी IPC धारा 376 की तुलना में, नया कानून परिस्थितियों के आधार पर सजा को और अधिक स्पष्ट और कठोर बनाता है, खासकर तब जब अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाए जिस पर समाज भरोसा करता है।

यह धारा सिर्फ कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर कानून बहुत गंभीर है। अगर आप या आपके आसपास कोई इस तरह की घटना से पीड़ित है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें और किसी अनुभवी आपराधिक वकील से कानूनी सलाह लें, ताकि न्याय की प्रक्रिया सही तरीके से आगे बढ़ सके।

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