भारतीय न्याय संहिता Section 132 of BNS भारत का नया आपराधिक कानून है, जो 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू हुआ। यह संहिता पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह लेती है। BNS की धारा 132 उन अपराधों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक (Public Servant) को उसके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के लिए हमला (Assault) करता है या आपराधिक बल (Criminal Force) का प्रयोग करता है।
यह धारा सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, ताकि पुलिसकर्मी, न्यायाधीश, राजस्व अधिकारी और अन्य शासकीय अधिकारी बिना किसी भय के अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन कर सकें। यदि आप BNS की धारा 132 को हिंदी में समझना चाहते हैं इसकी परिभाषा, सजा, जमानत की स्थिति और IPC से तुलना तो यह लेख आपके लिए है।
लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल | Bharatiya Nyaya Sanhita 2023
धारा Section 132 of BNS का मूल पाठ (हिंदी में)
132. जो कोई, किसी ऐसे व्यक्ति पर, जो लोक सेवक है, उस समय जब वैसे लोक सेवक के नाते वह उसके अपने कर्तव्य का निष्पादन कर रहा है, या इस आशय से कि उस व्यक्ति को वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य के निर्वहन से निवारित करे या भयोपरत करे या ऐसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या की जाने के लिए प्रयत्न किए गए किसी बात के परिणामस्वरूप हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
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धारा 132 BNS का सरल हिंदी अर्थ
सरल शब्दों में कहें तो यह धारा तब लागू होती है जब:
- कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक पर हमला करता है जब वह अपना कर्तव्य निभा रहा हो।
- कोई व्यक्ति लोक सेवक को उसके कर्तव्य से डराने या रोकने के इरादे से बल प्रयोग करता है।
- कोई व्यक्ति लोक सेवक द्वारा कर्तव्य पालन में की गई किसी विधिपूर्ण कार्रवाई के बदले हमला करता है।
धारा 132 BNS की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)
| विवरण | जानकारी |
| धारा का नाम | लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल |
| अधिनियम | भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) |
| अध्याय | अध्याय VI मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध |
| अधिकतम सजा | 2 वर्ष का कारावास |
| जुर्माना | लागू (न्यायालय के विवेक पर) |
| दोनों सजाएँ | एक साथ भी दी जा सकती हैं |
| अपराध की प्रकृति | संज्ञेय (Cognizable) |
| IPC समकक्ष धारा | धारा 353 IPC |
| लागू होने की तिथि | 1 जुलाई 2024 |
“लोक सेवक” कौन होता है? (Who is a Public Servant?)
BNS की धारा 132 केवल लोक सेवकों की सुरक्षा करती है। भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत लोक सेवक की परिभाषा व्यापक है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- पुलिसकर्मी (Police Officer) एसआई, कांस्टेबल, डीएसपी आदि
- न्यायिक अधिकारी (Judicial Officers) न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट
- राजस्व अधिकारी (Revenue Officers) पटवारी, तहसीलदार
- सरकारी डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी सरकारी अस्पताल में कार्यरत
- चुनाव अधिकारी (Election Officers)
- नगर पालिका अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी
“आपराधिक बल” क्या होता है? (What is Criminal Force?)
आपराधिक बल (Criminal Force) का अर्थ है किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, उस पर जानबूझकर बल प्रयोग करना। BNS की पूर्व की धाराओं में बल और हमले को परिभाषित किया गया है। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि:
- हमला (Assault): किसी को हमले का भय उत्पन्न कराना चाहे शारीरिक संपर्क हो या न हो।
- आपराधिक बल (Criminal Force): वास्तविक शारीरिक बल का प्रयोग धक्का देना, मारना, रोकना आदि।
धारा 132 दोनों ही स्थितियों को अपराध मानती है।
धारा 132 BNS बनाम IPC धारा 353: तुलनात्मक अध्ययन
BNS की धारा 132 पुरानी IPC की धारा 353 का नया रूप है। दोनों का उद्देश्य एक ही है लोक सेवकों को उनके कर्तव्य पालन के दौरान सुरक्षा प्रदान करना।
| तुलना का आधार | IPC धारा 353 | BNS धारा 132 |
| उद्देश्य | लोक सेवकों की सुरक्षा | लोक सेवकों की सुरक्षा |
| अधिकतम सजा | 2 वर्ष कारावास | 2 वर्ष कारावास |
| जुर्माना | हाँ | हाँ |
| भाषा | जटिल कानूनी भाषा | सरल और स्पष्ट भाषा |
| लागू कानून | IPC 1860 (निरस्त) | BNS 2023 (वर्तमान) |
| लागू तिथि | 1 जुलाई 2024 से निरस्त | 1 जुलाई 2024 से लागू |
धारा 132 BNS के अंतर्गत अपराध के उदाहरण
व्यावहारिक रूप से समझने के लिए कुछ उदाहरण देखते हैं जिनमें यह धारा लागू हो सकती है:
- पुलिस पर हमला: जब कोई व्यक्ति किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मी को धक्का देता है या मारता है।
- राजस्व अधिकारी को रोकना: जब कोई किसान या भू-स्वामी पटवारी या तहसीलदार को सरकारी भूमि माप करने से रोकने के लिए बल प्रयोग करता है।
- वन अधिकारी को बाधा: जब कोई वन विभाग के अधिकारी को अवैध कटाई रोकने से बलपूर्वक रोकता है।
- चुनाव अधिकारी पर हमला: जब कोई व्यक्ति मतदान प्रक्रिया के दौरान चुनाव अधिकारी को धमकी देता है या हमला करता है।
- सरकारी डॉक्टर को रोकना: जब किसी सरकारी अस्पताल में रोगी के परिजन डॉक्टर पर शारीरिक हमला करते हैं।
धारा 132 BNS के तहत सजा और दंड (Punishment)
BNS की धारा 132 के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित दंड हो सकता है:
- कारावास: अधिकतम 2 वर्ष साधारण (Simple) या कठोर (Rigorous) कारावास में से कोई भी।
- जुर्माना (Fine): न्यायालय के विवेक पर उचित राशि।
- दोनों: कारावास और जुर्माना, दोनों एक साथ।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि न्यूनतम सजा का कोई प्रावधान नहीं है यानी न्यायाधीश मामले की परिस्थितियों के आधार पर उचित दंड निर्धारित करते हैं।
धारा 132 BNS जमानत की स्थिति (Bail Provisions)
- अपराध की प्रकृति: संज्ञेय (Cognizable) पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।
- जमानत: यह धारा सामान्यतः जमानतीय (Bailable) प्रकृति की मानी जाती है, अर्थात् आरोपी को जमानत मिल सकती है।
- विचारणीय: मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा विचारण (Trial) होता है।
धारा 132 BNS के अंतर्गत अपराध साबित करने के लिए आवश्यक तत्व
न्यायालय में BNS की धारा 132 के तहत दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन पक्ष को निम्नलिखित तत्व प्रमाणित करने होते हैं:
- पीड़ित व्यक्ति लोक सेवक था उसकी सरकारी हैसियत प्रमाणित होनी चाहिए।
- आरोपी ने हमला या आपराधिक बल का प्रयोग किया केवल मौखिक विवाद इस धारा में नहीं आता।
- लोक सेवक अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा था हमले के समय वह आधिकारिक कार्य में संलग्न था।
- आशय (Intention) स्पष्ट था कर्तव्य से रोकना, डराना या प्रतिशोध लेना।
यदि इनमें से कोई भी तत्व सिद्ध नहीं होता, तो आरोपी को इस धारा के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
महत्वपूर्ण न्यायिक व्याख्या और दिशा-निर्देश
भारतीय न्यायालयों ने लोक सेवकों पर हमले से संबंधित मामलों में बार-बार यह स्पष्ट किया है कि:
- केवल मौखिक विरोध इस धारा के अंतर्गत नहीं आता।
- यदि लोक सेवक अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर काम कर रहा था, तो यह धारा लागू नहीं होती।
- सरकारी कर्मचारी की वर्दी या पहचान पत्र होना जरूरी नहीं लेकिन उसकी सरकारी हैसियत आरोपी को ज्ञात होनी चाहिए।
- स्व-रक्षा (Self-Defence): यदि लोक सेवक स्वयं अवैध रूप से कार्य कर रहा था, तो आत्मरक्षा का अधिकार उपलब्ध हो सकता है।
Conclusion
Section 132 of BNS भारतीय लोकतंत्र और शासन व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है। यह धारा सुनिश्चित करती है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी बिना किसी भय, बाधा या हिंसा के अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
पुरानी IPC की धारा 353 की तुलना में BNS की धारा 132 की भाषा अधिक सरल, स्पष्ट और आम नागरिकों के समझने योग्य है। सजा का प्रावधान वही है अधिकतम 2 वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों लेकिन नई संहिता में कानूनी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया गया है।
यदि आप किसी ऐसी स्थिति में हैं जहाँ यह धारा लागू हो रही हो चाहे आप पीड़ित लोक सेवक हों या आरोपी तो किसी अनुभवी आपराधिक वकील से तत्काल परामर्श लें। कानून की सही जानकारी और समय पर कानूनी सहायता आपके अधिकारों की रक्षा कर सकती है।