Section 305

Section 305 of BNS in Hindi

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Written by Admin

May 20, 2026

भारत में 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 लागू हो गई है, जिसने पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 की जगह ली है। इस नए कानून में संपत्ति के विरुद्ध अपराधों को और अधिक स्पष्ट एवं व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है। BNS की धारा 305 उन्हीं महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक है, जो किसी आवासीय घर, परिवहन के साधन, पूजा स्थल या सरकारी संपत्ति में की गई चोरी को गंभीर अपराध मानती है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि BNS Section 305 क्या है, इसमें क्या-क्या शामिल है, इसकी सजा क्या है, और पुराने IPC की धारा 380 से यह किस प्रकार अलग है — तो यह लेख आपके लिए पूरी जानकारी एक ही जगह प्रस्तुत करता है।

Section 305 of BNS in Hindi: किसी आवासीय घर, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी

BNS की धारा 305 भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय XVII (संपत्ति के विरुद्ध अपराध) के अंतर्गत आती है। इस धारा का शीर्षक है: “निवास-गृह, या यातायात के साधन या पूजा स्थल, आदि में चोरी।”

इस धारा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो चोरी सामान्य स्थानों से नहीं बल्कि संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों से की जाए, उसे कठोर दंड मिले। क्योंकि ऐसी चोरी से न केवल व्यक्तिगत नुकसान होता है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुँचती है।

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किसी आवासीय घर, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी — Bharatiya Nyaya Sanhita 2023

धारा 305 का मूल पाठ (हिंदी में)

BNS की धारा 305 के अनुसार, जो कोई भी निम्नलिखित स्थानों या परिस्थितियों में चोरी करता है, उसे दण्डित किया जाएगा:

क्र.सं.स्थान / परिस्थितिविवरण
(a)आवासीय भवन, तंबू या जलयानकोई भी इमारत, तंबू या जहाज जो मानव आवास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग किया जाता हो
(b)परिवहन के साधन की चोरीमाल या यात्रियों को ले जाने वाले वाहन (जैसे ट्रक, बस, ट्रेन) की स्वयं चोरी करना
(c)परिवहन साधन से सामान की चोरीमाल या यात्रियों को ले जाने वाले वाहन में रखे किसी सामान या वस्तु की चोरी करना
(d)पूजा स्थल में मूर्ति या प्रतिमा की चोरीकिसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या अन्य पूजा स्थल में रखी मूर्ति या धार्मिक प्रतीक की चोरी
(e)सरकारी या स्थानीय निकाय की संपत्तिसरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण (जैसे नगर निगम, पंचायत) की संपत्ति की चोरी

दण्ड: उपरोक्त में से किसी भी परिस्थिति में चोरी सिद्ध होने पर अपराधी को 7 वर्ष तक की कारावास (सादी या कठोर) और जुर्माना दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।

धारा 305 के अंतर्गत शामिल स्थानों का विस्तृत विवरण

1. आवासीय भवन, तंबू या जलयान (Dwelling House, Tent or Vessel)

यह प्रावधान उन सभी स्थानों को कवर करता है जहाँ कोई व्यक्ति निवास करता हो या जहाँ कोई संपत्ति सुरक्षित रखी गई हो। इसमें शामिल हैं:

  • पक्के या कच्चे मकान
  • किराये के फ्लैट या कमरे
  • जंगल में लगाए गए तंबू या कैम्प
  • नदी या समुद्र में रहने के लिए उपयोग किए जाने वाले जहाज या नाव
  • गोदाम जहाँ सामान सुरक्षित रखा गया हो

यह ध्यान देने योग्य है कि यदि भवन आवास के लिए उपयोग नहीं हो रहा और उसमें केवल सामान रखा है, तब भी यह धारा लागू होती है।

2. परिवहन के साधन (Means of Transport)

यह खंड दो भागों में है:

  • साधन की स्वयं चोरी: यदि कोई पूरी बस, ट्रक, रेलवे वैगन आदि ही चुरा ले।
  • साधन से सामान की चोरी: यदि यात्री की ट्रेन में रखी पेटी, बस में रखा सामान, या ट्रक में लदा माल चुराया जाए।

उदाहरण: रात को ट्रेन में सो रहे यात्री का मोबाइल फोन चुराना — यह BNS धारा 305 के तहत दंडनीय होगा।

3. पूजा स्थल में मूर्ति या प्रतिमा (Idol or Icon in Place of Worship)

यह एक नया और विशेष प्रावधान है जो पुराने IPC की धारा 380 में नहीं था। धार्मिक स्थलों से मूर्तियों या पवित्र वस्तुओं की चोरी एक गंभीर सामाजिक और धार्मिक समस्या रही है। BNS ने इसे विशेष रूप से इस धारा में शामिल करके कड़ा संदेश दिया है।

इसमें शामिल हैं:

  • मंदिर से मूर्ति चुराना
  • मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या अन्य धार्मिक स्थल से पवित्र वस्तु चुराना
  • पूजा के लिए उपयोग किए जाने वाले आभूषण या प्रतीक चुराना

4. सरकारी या स्थानीय निकाय की संपत्ति (Government or Local Authority Property)

सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए यह प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें शामिल हैं:

  • सरकारी कार्यालयों से उपकरण या दस्तावेज़ चुराना
  • नगर निगम या ग्राम पंचायत की संपत्ति की चोरी
  • सड़क पर लगे सरकारी बिजली के तार, पाइप या अन्य अवसंरचना की चोरी

BNS धारा 305 और IPC धारा 380 में अंतर

BNS की धारा 305, पुराने IPC की धारा 380 का विस्तारित रूप है। नीचे दोनों की तुलना की गई है:

विशेषताIPC धारा 380 (पुराना कानून)BNS धारा 305 (नया कानून)
आवासीय भवन में चोरी✅ शामिल✅ शामिल
परिवहन साधन की चोरी❌ स्पष्ट उल्लेख नहीं✅ स्पष्ट रूप से शामिल
परिवहन साधन से सामान की चोरी❌ शामिल नहीं✅ नया प्रावधान
पूजा स्थल से मूर्ति/प्रतिमा की चोरी❌ शामिल नहीं✅ नया प्रावधान
सरकारी संपत्ति की चोरी❌ अलग से उल्लेख नहीं✅ नया प्रावधान
अधिकतम सजा7 वर्ष + जुर्माना7 वर्ष + जुर्माना

निष्कर्ष: BNS की धारा 305 पुराने IPC की धारा 380 से काफी विस्तृत है और इसमें चार नए महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े गए हैं।

धारा 305 के तहत सजा और जमानत

सजा का प्रावधान:

  • कारावास: न्यूनतम कोई सीमा नहीं, अधिकतम 7 वर्ष (सादी या कठोर)
  • जुर्माना: न्यायालय के विवेक पर निर्भर
  • दोनों: कारावास और जुर्माना एक साथ भी हो सकते हैं

जमानत (Bail):

BNS की धारा 305 के तहत मामला जमानतीय (Bailable) है या गैर-जमानतीय (Non-Bailable) — यह अपराध की गंभीरता, परिस्थितियों और न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है। सामान्यतः इस धारा के तहत मामले संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानतीय होते हैं।

विचारण (Trial):

इस धारा के तहत मामलों की सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट की अदालत में होती है।

BNS धारा 305 — व्यावहारिक उदाहरण

नीचे कुछ वास्तविक जीवन से संबंधित उदाहरण दिए गए हैं जिनमें यह धारा लागू होगी:

  1. घर में चोरी: रात को किसी के घर में घुसकर गहने या नकदी चुराना।
  2. ट्रेन में चोरी: सोते हुए यात्री का बैग, मोबाइल या पर्स चुराना।
  3. मंदिर से मूर्ति चोरी: किसी मंदिर से सोने या चांदी की मूर्ति चुराना।
  4. ट्रक से माल चोरी: हाईवे पर खड़े ट्रक से सामान उतार लेना।
  5. सरकारी संपत्ति: नगर निगम के कार्यालय से कंप्यूटर या फर्नीचर चुराना।
  6. बस में चोरी: यात्रियों की बस में रखे सामान की चोरी करना।

BNS धारा 305 के अंतर्गत अभियोजन के लिए आवश्यक तत्व

न्यायालय में इस धारा के तहत दोष सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है:

  1. चोरी का कार्य: BNS की धारा 303 के अनुसार चोरी की परिभाषा पूरी होनी चाहिए।
  2. विशेष स्थान: चोरी धारा 305 में उल्लिखित किसी विशेष स्थान पर हुई हो।
  3. आशय (Intention): चुराने का इरादा स्पष्ट रूप से सिद्ध हो।
  4. बेईमान अभिग्रहण: संपत्ति को बेईमानी से अपने कब्जे में लेना।

BNS धारा 305 — महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points)

  • यह धारा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय XVII के अंतर्गत आती है।
  • यह 1 जुलाई 2024 से पूरे भारत में लागू है।
  • पुराने IPC की धारा 380 की जगह अब BNS की धारा 305 प्रभावी है।
  • इसमें पूजा स्थल और परिवहन जैसे नए प्रावधान जोड़े गए हैं जो IPC में नहीं थे।
  • अधिकतम सजा 7 वर्ष की कारावास है।
  • यह पुलिस द्वारा संज्ञेय अपराध है अर्थात पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है।

Conclusion

BNS की धारा 305 भारतीय न्याय संहिता 2023 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह धारा सिर्फ आवासीय चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिवहन के साधनों, पूजा स्थलों और सरकारी संपत्ति को भी शामिल करके कानून को और अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाया गया है।

पुराने IPC की धारा 380 की तुलना में यह धारा कहीं अधिक विस्तृत है। इसमें पूजा स्थल से मूर्ति की चोरी और परिवहन साधन से सामान की चोरी जैसे नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जो समाज की वास्तविक जरूरतों को दर्शाते हैं।

यदि आप किसी ऐसे मामले में फँसे हैं जिसमें BNS की धारा 305 लागू हो सकती है — चाहे आप पीड़ित हों या अभियुक्त — तो किसी अनुभवी आपराधिक वकील से तुरंत परामर्श लें। कानून की सही जानकारी ही आपका सबसे बड़ा हथियार है।

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