109 bns in hindi

Section 115 of BNS in Hindi: हत्या का प्रयास

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Written by Admin

May 13, 2026

भारत में 1 जुलाई 2024 से लागू हुई भारतीय न्याय संहिता 109 bns in hindi ने पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ले ली है। इस नए कानून में धारा 109 उस अपराध को परिभाषित करती है जिसे हम “हत्या का प्रयास” (Attempt to Murder) कहते हैं। यह धारा पहले की IPC की धारा 307 का नया और अधिक स्पष्ट रूप है।

अगर कोई व्यक्ति किसी को मारने की नीयत से कोई कदम उठाता है, लेकिन किसी कारण से मृत्यु नहीं होती — तो भी वह अपराधी है। BNS की धारा 109 ऐसे ही मामलों को कवर करती है। इस लेख में हम इस धारा को सरल हिंदी में, उदाहरणों और तालिकाओं के साथ, पूरी तरह समझेंगे।

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हत्या का प्रयास Bharatiya Nyaya Sanhita 2023

भारतीय न्याय संहिता 2023 का अध्याय VI “मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराधों” से संबंधित है। इसी अध्याय में धारा 109 आती है जो हत्या के प्रयास को एक गंभीर दंडनीय अपराध मानती है।

इस धारा के तहत तीन मुख्य तत्व होने चाहिए:

  1. आशय (Intention): अपराधी का स्पष्ट इरादा किसी व्यक्ति की हत्या करने का होना चाहिए।
  2. कृत्य (Act): अपराधी ने उस इरादे से कोई ठोस कार्य किया हो — जैसे गोली चलाना, जहर देना, या छुरा मारना।
  3. असफल परिणाम (Failed Result): वह कार्य अपने उद्देश्य में असफल रहा, यानी पीड़ित की मृत्यु नहीं हुई।

ध्यान दें: केवल तैयारी करना (जैसे बंदूक खरीदना या जहर खरीदना) अपराध नहीं है। जैसे ही कृत्य की दिशा में कदम उठाया जाता है, धारा 109 लागू हो जाती है। यही “तैयारी और प्रयास के बीच का अंतर” (Difference between Preparation and Attempt) है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) – धारा 109

1. मूल पाठ (Original Text)

धारा 109 का हिंदी पाठ

(1) जो कोई किसी कृत्य को ऐसे आशय या ज्ञान से और ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उस कृत्य द्वारा मृत्यु कारित कर देता, तो वह हत्या का दोषी होता —

  • वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
  • और यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति (Hurt) कारित हो जाए, तो वह अपराधी आजीवन कारावास से या उक्त कारावास से दण्डनीय होगा।

(2) जब उपधारा (1) के अधीन अपराध करने वाला कोई व्यक्ति आजीवन कारावास के दण्डादेश के अधीन है, और वह उपहति कारित करता है —

  • तो वह मृत्युदण्ड (फाँसी) या आजीवन कारावास (जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा) से दण्डित किया जाएगा।

धारा 109 की कानूनी स्थिति — एक नजर में

विवरणस्थिति
अपराध का नामहत्या का प्रयास (Attempt to Murder)
पुरानी धारा (IPC)धारा 307
नई धारा (BNS)109 bns in hindi
संज्ञेयतासंज्ञेय (Cognizable) — बिना वारंट गिरफ्तारी
जमानतगैर-जमानती (Non-Bailable)
विचारणीय न्यायालयसत्र न्यायालय (Court of Session)
शमनीयतागैर-शमनीय (Non-Compoundable)

2. सजा का फ्लोचार्ट (Flow Chart)

नीचे दिए गए फ्लोचार्ट से समझें कि किस परिस्थिति में क्या सजा मिलती है:

क्या अपराधी ने हत्या के आशय से कोई कृत्य किया?

            |

           हाँ

            |

     क्या पीड़ित को चोट (Hurt) लगी?

      /                     \

    नहीं                    हाँ

      |                       |

10 वर्ष तक            क्या अपराधी पहले से

कारावास +            आजीवन कारावास में है?

जुर्माना              /              \

                    नहीं              हाँ

                      |                 |

              आजीवन कारावास      मृत्युदंड (फाँसी)

              या 10 वर्ष तक      या शेष जीवन भर

              कारावास             कारावास

सजा की तालिका (Punishment Table)

परिस्थितिसजा का प्रकार
हत्या का प्रयास — कोई चोट नहींअधिकतम 10 वर्ष कारावास + जुर्माना
हत्या का प्रयास — चोट लगीआजीवन कारावास या 10 वर्ष कारावास + जुर्माना
आजीवन कारावास में बंद व्यक्ति द्वारा प्रयास — चोट लगीमृत्युदंड या शेष प्राकृत जीवन कारावास

महत्वपूर्ण: जुर्माने की राशि कानून में निर्धारित नहीं है — यह न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करती है।

3. महत्वपूर्ण दृष्टांत (Illustrations)

BNS की धारा 109 में स्वयं चार आधिकारिक उदाहरण (Illustrations) दिए गए हैं। इन्हें समझना बेहद जरूरी है:

दृष्टांत (क) — गोली चलाना (Shooting)

राम, श्याम को मारने के आशय से उस पर ऐसी परिस्थितियों में गोली चलाता है कि यदि मृत्यु हो जाती, तो राम हत्या का दोषी होता।

  • परिणाम: श्याम बच जाता है।
  • कानूनी स्थिति: राम धारा 109 के अधीन दण्डनीय है — भले ही गोली लगी हो या न लगी हो।
  • सीख: इरादा + कृत्य = अपराध। परिणाम जरूरी नहीं।

दृष्टांत (ख) — शिशु को अरक्षित छोड़ना (Abandoning a Child)

क एक सुकुमार शिशु की मृत्यु के आशय से उसे एक निर्जन स्थान में अरक्षित छोड़ देता है।

  • परिणाम: शिशु की मृत्यु नहीं होती।
  • कानूनी स्थिति: क ने धारा 109 में परिभाषित अपराध किया है।
  • सीख: शारीरिक हमला जरूरी नहीं — मृत्यु के इरादे से कोई भी कार्य अपराध है।

दृष्टांत (ग) — बंदूक खरीदना बनाम गोली चलाना (Preparation vs. Attempt)

क, य की हत्या के आशय से बंदूक खरीदता है और उसे भरता है।

  • पहली स्थिति: केवल बंदूक खरीदी — अपराध नहीं (यह केवल तैयारी है)।
  • दूसरी स्थिति: क ने य पर गोली चलाई — अपराध हो गया (यह प्रयत्न है)।
  • सीख: तैयारी (Preparation) और प्रयास (Attempt) में फर्क समझना जरूरी है। गोली चलाने पर धारा 109 लागू; यदि चोट लगी तो उपधारा (1) के अनुसार कठोर सजा।

दृष्टांत (घ) — जहर मिलाना (Poisoning)

क, य की हत्या के आशय से जहर खरीदता है और उसे भोजन में मिलाता है।

  • पहली स्थिति: जहर मिला लिया लेकिन अभी खाने में नहीं मिलाया — अपराध नहीं
  • दूसरी स्थिति: जहर मिला हुआ खाना य की मेज पर रख दिया — अपराध हो गया
  • सीख: जिस क्षण जहर भोजन में मिलाकर पीड़ित के सामने रखा गया, अपराध शुरू हो गया।

वास्तविक जीवन के उदाहरण

उदाहरण 1: मोहन अपनी पत्नी को जहर देकर मारना चाहता है। वह खाने में जहर मिलाकर परोसता है। पत्नी समय पर इलाज से बच जाती है। → मोहन पर धारा 109 लागू; संभावित सजा: आजीवन कारावास + जुर्माना

उदाहरण 2: भूरा (जो पहले से आजीवन कारावास में है) जेल में कालू पर धारदार हथियार से वार करता है, जिससे कालू घायल हो जाता है। → भूरा पर धारा 109(2) लागू; संभावित सजा: मृत्युदंड या शेष जीवन कारावास

IPC धारा 307 बनाम BNS धारा 109 — तुलना

बिंदुIPC धारा 307BNS धारा 109
आधार कानूनभारतीय दंड संहिता, 1860भारतीय न्याय संहिता, 2023
लागू तिथिपुराना कानून1 जुलाई 2024 से
अधिकतम सजा (बिना चोट)10 वर्ष10 वर्ष
आजीवन कारावासी द्वारा चोटमृत्युदंड या आजीवनमृत्युदंड या शेष जीवन कारावास
स्पष्टताकुछ अस्पष्टता थीअधिक स्पष्ट और व्यापक

Conclusion

BNS की धारा 109 भारतीय आपराधिक कानून का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसे समझने की जरूरत हर नागरिक को है क्योंकि:

  • यह धारा केवल मृत्यु होने पर नहीं, हत्या के इरादे से कार्य करने पर भी लागू होती है।
  • सजा 10 वर्ष से लेकर मृत्युदंड तक हो सकती है।
  • यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है — पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
  • तैयारी और प्रयास का अंतर जानना कानूनी दृष्टि से अनिवार्य है।

यदि आप या आपका कोई परिचित इस धारा से जुड़े किसी मामले में है, तो तुरंत एक अनुभवी आपराधिक वकील (Criminal Lawyer) से परामर्श लें। बिना कानूनी सलाह के कोई बयान न दें।

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