BNS Section 318

BNS Section 318 in Hindi

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Written by Admin

May 17, 2026

भारत में आपराधिक कानून व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव 1 जुलाई 2024 से हुआ, जब भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita), 2023 ने पुराने Indian Penal Code (IPC), 1860 की जगह ली। इसी संहिता की धारा 318 अब धोखाधड़ी (Cheating) के अपराध को परिभाषित करती है। पहले यह अपराध IPC की धारा 415, 417, 418 और 420 के अंतर्गत आता था।

अगर आपने कभी सुना हो — “उस पर 420 का केस हुआ” — तो समझ लीजिए कि अब वही अपराध BNS Section 318 के तहत दर्ज होगा। यह लेख आपको इस धारा की हर बारीकियां — परिभाषा, उपधाराएं, दंड, जमानत और उदाहरण — सरल हिंदी में समझाएगा।

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धोखाधड़ी — Bharatiya Nyaya Sanhita 2023

धारा 318 क्या कहती है? (मूल पाठ — हिंदी में)

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(1) के अनुसार:

“जो कोई किसी व्यक्ति को धोखा देकर, कपटपूर्वक या बेईमानी से उस व्यक्ति को किसी संपत्ति को किसी व्यक्ति को परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है, या किसी व्यक्ति के लिए कोई संपत्ति प्रतिधारण करने के लिए सहमत करता है, या जानबूझकर उस व्यक्ति को कुछ करने या न करने के लिए उत्प्रेरित करता है जो उसके शरीर, मन, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है — वह धोखाधड़ी करता है।”

सरल भाषा में कहें तो — धोखाधड़ी तब होती है जब कोई व्यक्ति झूठ बोलकर, तथ्य छुपाकर या फर्जी दावा करके किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाता है, चाहे वह नुकसान संपत्ति का हो, मानसिक हो, शारीरिक हो या प्रतिष्ठा का हो।

धोखाधड़ी के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients)

BNS Section 318 के तहत धोखाधड़ी साबित करने के लिए निम्न तत्व जरूरी हैं:

  1. छल-कपट (Deception) — आरोपी ने जानबूझकर झूठा तथ्य प्रस्तुत किया या सच्चाई छुपाई
  2. बेईमान इरादा (Dishonest Intent) — धोखे का इरादा अपराध की शुरुआत से ही होना चाहिए
  3. प्रेरणा (Inducement) — पीड़ित ने उसी धोखे के कारण कोई कार्य किया या संपत्ति दी
  4. नुकसान (Harm or Loss) — शरीर, मन, संपत्ति या प्रतिष्ठा को वास्तविक या संभावित हानि

महत्वपूर्ण: सुप्रीम कोर्ट ने A.M. Mohan v. The State (2023) में स्पष्ट किया कि बेईमान इरादा अपराध के समय ही होना चाहिए, बाद में पैसे न लौटाना अपने आप में धोखाधड़ी नहीं है।

धारा 318 की उपधाराएं और दंड (Sub-sections & Punishment)

उपधाराअपराध का प्रकारदंडसंज्ञेय/असंज्ञेयजमानती/अजमानती
318(1)धोखाधड़ी की परिभाषा
318(2)साधारण धोखाधड़ी3 वर्ष कारावास / जुर्माना / दोनोंअसंज्ञेयजमानती
318(3)विश्वास भंग + धोखाधड़ी (जब आरोपी पीड़ित की रक्षा के लिए कानूनी रूप से बाध्य था)5 वर्ष कारावास / जुर्माना / दोनोंअसंज्ञेयजमानती
318(4)संपत्ति परिदान / मूल्यवान दस्तावेजों से जुड़ी धोखाधड़ी7 वर्ष कारावास + जुर्माना (दोनों अनिवार्य)संज्ञेयअजमानती

IPC धारा 420 बनाम BNS धारा 318 — क्या बदला?

विवरणIPC धारा 420BNS धारा 318
लागू होने की तारीख1860 से 30 जून 20241 जुलाई 2024 से
अपराधों का विस्तारIPC 415–420 अलग-अलगएक धारा में समेकित
डिजिटल धोखाधड़ीस्पष्ट उल्लेख नहींइलेक्ट्रॉनिक माध्यम शामिल
अधिकतम सजा7 वर्ष + जुर्माना7 वर्ष + जुर्माना (समान)
विश्वास भंग की उपधाराअलग व्याख्या318(3) में स्पष्ट

सबसे बड़ा बदलाव: BNS Section 318 अब डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को भी स्पष्ट रूप से कवर करती है — जो पुराने IPC में 1860 में लिखे जाने के कारण संभव नहीं था।


धारा 318 के तहत धोखाधड़ी के उदाहरण

BNS 2023 में इस धारा के साथ कई स्पष्टीकरण (Illustrations) दिए गए हैं:

  • उदाहरण 1: A, B को झूठा बताता है कि वह सरकारी अधिकारी है और उधार पर गाड़ी ले लेता है। लौटाने का कोई इरादा नहीं था — यह धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी है।
  • उदाहरण 2: एक मोबाइल विक्रेता एडवांस फीचर्स वाले फोन का विज्ञापन करता है, लेकिन साधारण मॉडल देता है — यह धारा 318(2) के तहत धोखाधड़ी है।
  • उदाहरण 3: एक वकील अपने मुवक्किल के केस के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर पैसे कमाता है — यह धारा 318(3) के तहत आता है क्योंकि वह कानूनी रूप से मुवक्किल की रक्षा के लिए बाध्य था।
  • उदाहरण 4: A, B को नकली शेयर ट्रांसफर दस्तावेजों से प्रेरित करके पैसे ठगता है — यह धारा 318(4) के तहत गंभीरतम श्रेणी है।
  • उदाहरण 5: A जानबूझकर Z को यह विश्वास दिलाता है कि वह नील का माल देगा, और Z से पेशगी ले लेता है — पर देने का इरादा नहीं था — यह धोखाधड़ी है। लेकिन अगर A का इरादा था और बाद में अनुबंध टूटा, तो यह सिविल विवाद होगा, आपराधिक नहीं।

साइबर धोखाधड़ी और BNS धारा 318

आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। BNS Section 318 अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों — WhatsApp, email, fake websites, UPI fraud — के जरिए की गई धोखाधड़ी को भी स्पष्ट रूप से कवर करती है।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में BNS 318 के साथ ये धाराएं भी लागू होती हैं:

  • IT Act Section 66C — इलेक्ट्रॉनिक पहचान की चोरी
  • IT Act Section 66D — कंप्यूटर संसाधनों से प्रतिरूपण (Impersonation)

शिकायत दर्ज कराने के लिए: cybercrime.gov.in पर जाएं।

धारा 318 के तहत शिकायत कैसे दर्ज करें?

  1. नजदीकी पुलिस थाने में FIR दर्ज कराएं
  2. अगर पुलिस FIR नहीं लेती, तो Judicial Magistrate के सामने धारा 223 BNSS के तहत सीधी शिकायत करें
  3. साइबर धोखाधड़ी के लिए cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत करें
  4. हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें

Conclusion

BNS की धारा 318 भारतीय आपराधिक कानून में धोखाधड़ी के विरुद्ध एक मजबूत और आधुनिक ढांचा प्रस्तुत करती है। यह न केवल पारंपरिक धोखाधड़ी को, बल्कि डिजिटल युग की ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड और विश्वास भंग जैसे अपराधों को भी कानूनी दायरे में लाती है।

इस धारा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपराध की गंभीरता के अनुसार दंड का क्रमिक विभाजन करती है — साधारण धोखाधड़ी के लिए 3 साल, विश्वास भंग के लिए 5 साल और संपत्ति से जुड़ी गंभीर धोखाधड़ी के लिए 7 साल।

अगर आप धोखाधड़ी के शिकार हैं या किसी पर इस धारा का आरोप लगा है — दोनों ही स्थितियों में किसी अनुभवी आपराधिक वकील (Criminal Lawyer) से परामर्श लेना सबसे जरूरी कदम है। कानूनी जागरूकता (Legal Awareness) आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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