भारत में नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद से लोगों के मन में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 की अलग-अलग धाराओं को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण धारा है Section 118 of BNS in Hindi, जो खतरनाक हथियारों या साधनों से जुड़े मामलों से संबंधित है। यह धारा पुरानी IPC की धारा 324 और 326 की जगह ले चुकी है, इसलिए जानना जरूरी है कि कानून में क्या बदला और क्या वैसा ही रहा।
इस आर्टिकल में हम Section 118 BNS को आसान भाषा में, उसकी दोनों उपधाराओं, सजा के प्रावधान, जमानत की स्थिति और IPC से तुलना के साथ विस्तार से समझेंगे।
Section 118 of BNS in Hindi: खतरनाक हथियारों या साधनों से स्वेच्छा से चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना
BNS की धारा 118, भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय VI (“मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध”) का हिस्सा है। इस धारा में उन मामलों को कवर किया गया है जहां कोई व्यक्ति किसी हथियार, धार वाली चीज़, आग, जहर, संक्षारक पदार्थ, विस्फोटक या किसी जीव-जंतु का उपयोग करके जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति को चोट या गंभीर चोट पहुंचाता है।
सरल भाषा में कहें तो यह धारा सामान्य मार-पीट से अलग है—यहां अपराध की गंभीरता इस्तेमाल किए गए साधन या हथियार की वजह से बढ़ जाती है।
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Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 की धारा 118 क्या है?
Section 118 को दो उपधाराओं में बांटा गया है:
| उपधारा | विषय |
| Section 118(1) | खतरनाक हथियार या साधन से स्वेच्छा से चोट (Hurt) पहुंचाना |
| Section 118(2) | खतरनाक हथियार या साधन से स्वेच्छा से घोर/गंभीर चोट (Grievous Hurt) पहुंचाना |
यानी अगर चोट सामान्य है तो उपधारा (1) लागू होगी, लेकिन अगर चोट गंभीर प्रकृति की है (जैसे हड्डी टूटना, अंग खराब होना, जान को खतरा) तो उपधारा (2) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
BNS Section 118(1) in Hindi
Section 118(1) BNS क्या है?
धारा 118(1) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धारा 122(1) में बताई गई परिस्थिति को छोड़कर, गोली चलाने, छेदने या काटने वाले किसी उपकरण से, या किसी ऐसे साधन से जिसका आक्रामक हथियार के रूप में इस्तेमाल होने पर मृत्यु होना संभावित हो, या आग, गर्म पदार्थ, जहर, संक्षारक पदार्थ, विस्फोटक पदार्थ या किसी हानिकारक पदार्थ अथवा किसी जीव-जंतु के माध्यम से जानबूझकर किसी को चोट पहुंचाता है, तो वह इस उपधारा के तहत दोषी माना जाएगा।
इसमें शामिल कुछ सामान्य उदाहरण:
- चाकू, छुरी या ब्लेड से चोट पहुंचाना
- गर्म लोहे या तेजाब (एसिड) से नुकसान पहुंचाना
- जहर या नुकसानदायक रसायन का इस्तेमाल करना
- आग या विस्फोटक पदार्थ से चोट पहुंचाना
- कुत्ते या किसी जीव-जंतु से किसी को जानबूझकर घायल करना
Section 118(1) BNS Punishment
| बिंदु | विवरण |
| कारावास | 3 वर्ष तक |
| जुर्माना | 20,000 रुपये तक |
| सजा का प्रकार | कारावास या जुर्माना, या दोनों |
Section 118(1) BNS is Bailable or Not?
Section 118(1) BNS एक गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध है। इसका मतलब है कि पुलिस सीधे जमानत नहीं दे सकती; आरोपी को जमानत के लिए कोर्ट का रुख करना पड़ता है। हालांकि गैर-जमानती होने के बावजूद, कोर्ट परिस्थितियों के आधार पर अग्रिम (anticipatory) या नियमित जमानत दे सकता है।
BNS Section 118(2) in Hindi
Section 118(2) BNS क्या है?
धारा 118(2) उन मामलों से संबंधित है जहां उपधारा (1) में बताए गए साधनों का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति को घोर उपहति (Grievous Hurt) पहुंचाई जाती है, बशर्ते वह धारा 122(2) में बताई गई स्थिति न हो। यानी जब चोट गंभीर हो—जैसे स्थायी अपंगता, हड्डी टूटना, चेहरे पर स्थायी विकृति या जीवन को खतरा—तो यह उपधारा लागू होती है।
Section 118(2) BNS Punishment
| बिंदु | विवरण |
| कारावास | आजीवन कारावास, या 1 वर्ष से कम नहीं किंतु 10 वर्ष तक |
| जुर्माना | अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा |
| सजा का प्रकार | कारावास के साथ जुर्माना भी |
जैसा कि स्पष्ट है, उपधारा (2) की सजा उपधारा (1) से कहीं अधिक सख्त है, क्योंकि इसमें चोट की गंभीरता और पीड़ित को होने वाला स्थायी नुकसान ज्यादा वजन रखता है।
Section 118(2) BNS is Bailable or Not?
Section 118(2) BNS भी गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध है। चोट गंभीर होने और सजा का प्रावधान सख्त होने के कारण, इस धारा में जमानत मिलना उपधारा (1) की तुलना में अधिक कठिन होता है और पूरी तरह कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है।
Section 118(2) BNS Triable by Which Court?
Section 118(2) के तहत मामलों की गंभीरता को देखते हुए, यह अपराध सामान्यतः सत्र न्यायालय (Court of Session) द्वारा विचारणीय (triable) होता है, जबकि उपधारा (1) के मामलों की सुनवाई मैजिस्ट्रेट कोर्ट में भी हो सकती है।
Section 118 BNS in IPC
IPC की कौन-सी धारा के बराबर है?
BNS Section 118, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 324 और धारा 326 का स्थान लेती है:
- Section 118(1) BNS ≈ IPC Section 324 (खतरनाक हथियार से स्वेच्छा से चोट पहुंचाना)
- Section 118(2) BNS ≈ IPC Section 326 (खतरनाक हथियार से स्वेच्छा से घोर चोट पहुंचाना)
BNS Section 118 और IPC में अंतर
| बिंदु | IPC (पुराना कानून) | BNS Section 118 (नया कानून) |
| संबंधित धाराएं | Section 324 और Section 326 | एक ही धारा 118 में दो उपधाराएं |
| संरचना | अलग-अलग धाराएं | एक धारा के अंतर्गत समायोजित |
| सजा (साधारण चोट) | 3 वर्ष + जुर्माना | 3 वर्ष या 20,000 रुपये जुर्माना या दोनों |
| सजा (गंभीर चोट) | आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक | आजीवन कारावास या 1-10 वर्ष + जुर्माना |
| भाषा एवं संरचना | पुरानी औपनिवेशिक भाषा | सरल व अपडेटेड भाषा |
स्पष्ट है कि मूल भावना और सजा का ढांचा काफी हद तक वैसा ही रखा गया है, लेकिन कानून को सरल और व्यवस्थित बनाने के लिए दोनों धाराओं को एक साथ जोड़ दिया गया है।
Section 118 BNS के महत्वपूर्ण बिंदु
- यह धारा अध्याय VI (“मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध”) के अंतर्गत आती है।
- अपराध की गंभीरता तय करने में इस्तेमाल किए गए हथियार या साधन की भूमिका अहम होती है।
- सामान्य चोट और घोर चोट के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान है।
- दोनों उपधाराएं गैर-जमानती हैं।
- धारा 122 में बताई गई विशेष परिस्थितियों को इस धारा से अलग रखा गया है।
- IPC की धारा 324 व 326 की जगह यही धारा अब लागू होती है।
FAQ’s
Section 118 BNS किस IPC Section के बराबर है?
Section 118 BNS, IPC की धारा 324 (उपधारा 1) और धारा 326 (उपधारा 2) के समतुल्य है।
क्या Section 118(1) BNS जमानती है?
नहीं, Section 118(1) BNS एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें जमानत कोर्ट के विवेक पर निर्भर करती है।
क्या Section 118(2) BNS जमानती है?
नहीं, Section 118(2) BNS भी गैर-जमानती अपराध है और गंभीर चोट के कारण इसमें जमानत मिलना अधिक कठिन होता है।
Section 118(2) BNS का ट्रायल किस कोर्ट में होता है?
Section 118(2) के मामलों की सुनवाई सामान्यतः सत्र न्यायालय (Court of Session) में होती है।
Section 118 BNS में अधिकतम सजा कितनी है?
उपधारा (1) में अधिकतम 3 वर्ष की सजा है, जबकि उपधारा (2) में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
Conclusion
BNS की धारा 118 भारतीय न्याय संहिता 2023 के सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक है, जो खतरनाक हथियारों या साधनों से चोट पहुंचाने वाले अपराधों पर सख्ती से रोक लगाती है। इस धारा को समझना न केवल कानून के छात्रों या वकीलों के लिए जरूरी है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि इससे उन्हें अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की सही जानकारी मिलती है। उपधारा (1) सामान्य चोट से और उपधारा (2) गंभीर चोट से जुड़ी है, और दोनों में सजा की गंभीरता अलग-अलग रखी गई है।
अगर आप या आपका कोई परिचित Section 118 of BNS in Hindi से संबंधित किसी मामले का सामना कर रहे हैं, तो सही कानूनी सलाह लेना बेहद जरूरी है। किसी योग्य आपराधिक मामलों के वकील से सलाह लेकर ही जमानत, बचाव-पक्ष या अन्य कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाना चाहिए, क्योंकि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और कोर्ट का फैसला भी उन्हीं पर निर्भर करता है।