Section 106 BNS

Section 106 BNS in Hindi

User avatar placeholder
Written by Admin

June 16, 2026

भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) भारत की नई आपराधिक कानून व्यवस्था का आधार है, जिसने पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली है। इस नई संहिता में BNS की धारा 106 एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो लापरवाही या उतावलेपन से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने पर लागू होती है।

आज के दौर में सड़क दुर्घटनाएं, चिकित्सीय लापरवाही और अन्य असावधानीपूर्ण कार्य आम हो गए हैं। ऐसे में यह जानना बेहद ज़रूरी है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी गैर-जिम्मेदाराना हरकत से किसी दूसरे की जान ले लेता है, तो भारतीय कानून उसके साथ क्या व्यवहार करता है। यह लेख Section 106 BNS in Hindi को सरल भाषा में, पूरी जानकारी के साथ समझाता है धारा का पाठ, सज़ा, ज़मानत, संज्ञेयता, IPC से तुलना और व्यावहारिक उदाहरण सहित।

लापरवाही से मौत का कारण Bharatiya Nyaya Sanhita 2023

Section 106 BNS को दो उपधाराओं में विभाजित किया गया है BNS 106(1) और BNS 106(2)। आइए दोनों को विस्तार से समझें।

BNS धारा 106(1) सामान्य लापरवाही से मृत्यु

धारा का मूल पाठ (हिंदी में):

“जो कोई, उतावलेपन से या उपेक्षापूर्ण किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करता है, जो आपराधिक मानव वध की कोटि में नहीं आता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।”

यदि अपराध किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा किया जाए:

यदि चिकित्सीय प्रक्रिया के दौरान किसी पंजीकृत डॉक्टर की लापरवाही से रोगी की मृत्यु होती है, तो उसे दो वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सज़ा दी जाएगी।

स्पष्टीकरण: इस उपधारा में “रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी” से तात्पर्य उस चिकित्सक से है जिसके पास राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 के अंतर्गत मान्यताप्राप्त चिकित्सा योग्यता है और जिसका नाम राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर या किसी राज्य चिकित्सा रजिस्टर में दर्ज है।

BNS धारा 106(2) वाहन चलाते समय लापरवाही और घटनास्थल से फरार होना

धारा का मूल पाठ (हिंदी में):

“जो कोई, वाहन के उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण चलाने से, किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करता है, जो आपराधिक मानव वध की कोटि में नहीं आता है, और घटना के तत्काल पश्चात् इसे पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट किए बिना भाग जाता है, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।”

Related post: Section 132 of BNS in Hindi

यह उपधारा उन “हिट-एंड-रन” मामलों पर लागू होती है जिनमें चालक दुर्घटना के बाद घटनास्थल छोड़कर भाग जाता है और पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचित नहीं करता।

BNS धारा 106 की मुख्य विशेषताएं एक नज़र में

विवरणBNS 106(1) सामान्यBNS 106(1) डॉक्टरBNS 106(2) हिट एंड रन
अधिकतम सज़ा5 वर्ष कारावास2 वर्ष कारावास10 वर्ष कारावास
जुर्मानाहांहांहां
अपराध का प्रकारसंज्ञेय (Cognizable)संज्ञेयसंज्ञेय
जमानतजमानती (Bailable)जमानतीगैर-जमानती (Non-Bailable)
विचारण न्यायालयJMFC/CJMJMFC/CJMसत्र न्यायालय

धारा 106 BNS और IPC धारा 304A तुलना

BNS की धारा 106 पुरानी IPC की धारा 304A का स्थान लेती है। हालांकि दोनों का मूल भाव समान है, लेकिन BNS में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:

बिंदुIPC धारा 304ABNS धारा 106
अधिकतम सज़ा2 वर्ष5 वर्ष (सामान्य) / 10 वर्ष (हिट-एंड-रन)
डॉक्टरों के लिए प्रावधाननहींहां 2 वर्ष तक
हिट-एंड-रन प्रावधाननहींहां 10 वर्ष तक
उपधाराएंएकदो (106(1) और 106(2))
सज़ा की गंभीरताकमअधिक और स्पष्ट

यह स्पष्ट है कि BNS ने लापरवाही से मृत्यु के अपराध को अधिक गंभीरता से लिया है और दंड का विस्तार किया है।

धारा 106 BNS के तहत अपराध साबित करने के आवश्यक तत्व

किसी व्यक्ति को BNS की धारा 106 के तहत दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को निम्नलिखित तत्व न्यायालय में सिद्ध करने होते हैं:

  1. लापरवाहीपूर्ण या उतावला कार्य आरोपी ने कोई असावधानीपूर्ण या जल्दबाज़ी में किया गया कार्य किया हो।
  2. मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण उसी कार्य के परिणामस्वरूप पीड़ित की मृत्यु हुई हो।
  3. आपराधिक मानव वध नहीं यह कार्य जानबूझकर या इरादतन हत्या की श्रेणी में न आता हो।
  4. हिट-एंड-रन के मामले में वाहन चालक ने घटना के बाद बिना रिपोर्ट किए घटनास्थल छोड़ा हो।

BNS धारा 106 के व्यावहारिक उदाहरण

उदाहरण 1 सड़क दुर्घटना (BNS 106(1))

रमेश अपनी कार तेज़ गति से और बेपरवाही से चला रहा था। उसने एक पैदल यात्री को टक्कर मार दी, जिसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। रमेश रुका और पुलिस को सूचना दी। ऐसे में धारा 106(1) के तहत उस पर मुकदमा चलेगा और अधिकतम 5 वर्ष की सज़ा हो सकती है।

उदाहरण 2 हिट-एंड-रन (BNS 106(2))

सुरेश ने तेज़ रफ्तार ट्रक से एक मोटरसाइकिल सवार को कुचल दिया। घबराहट में वह बिना रुके और बिना पुलिस को सूचित किए भाग गया। इस मामले में धारा 106(2) लागू होगी और सज़ा 10 वर्ष तक हो सकती है।

उदाहरण 3 चिकित्सीय लापरवाही (BNS 106(1) डॉक्टर)

डॉ. अमित ने ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरती, जिससे मरीज की जान चली गई। चूंकि डॉ. अमित पंजीकृत चिकित्सक हैं, उन पर BNS 106(1) के तहत कार्यवाही होगी और अधिकतम 2 वर्ष की सज़ा का प्रावधान है।

उदाहरण 4 पिकनिक पर लापरवाही

अमित अपने दोस्त राहुल को तेज़ बहाव वाली नदी में नहाने के लिए ले गया, जबकि दूसरे दोस्त मना करते रहे। राहुल की पानी में डूबकर मौत हो गई। यहां अमित का कार्य उतावलेपन की श्रेणी में आता है, इसलिए धारा 106(1) लागू होगी।

BNS धारा 106 “उतावलापन” और “लापरवाही” में अंतर

इस धारा को समझने के लिए इन दोनों शब्दों का अर्थ जानना ज़रूरी है:

  • उतावलापन (Rashness): जब कोई व्यक्ति यह जानते हुए भी कि उसके कार्य से खतरा हो सकता है, फिर भी बिना सोचे-समझे वह कार्य करता है।
  • लापरवाही (Negligence): जब कोई व्यक्ति उस सावधानी का पालन नहीं करता जो एक समझदार और जिम्मेदार इंसान से अपेक्षित होती है।

दोनों में यह महत्वपूर्ण अंतर है कि उतावलेपन में व्यक्ति जोखिम से परिचित होता है, जबकि लापरवाही में वह उस जोखिम के प्रति उदासीन रहता है।

धारा 106 BNS जमानत और संज्ञेयता

BNS 106(1) के लिए:

  • अपराध का प्रकार: संज्ञेय (Cognizable) पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
  • जमानत: जमानती (Bailable) आरोपी को जमानत का अधिकार होता है।
  • विचारण: JMFC (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) या CJM (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट)।

BNS 106(2) के लिए:

  • अपराध का प्रकार: संज्ञेय (Cognizable)।
  • जमानत: गैर-जमानती (Non-Bailable) जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर।
  • विचारण: सत्र न्यायालय (Sessions Court)।

BNS धारा 106 के तहत आने वाले अन्य सामान्य मामले

  • निर्माण स्थल पर सुरक्षा नियमों का पालन न करने से मज़दूर की मृत्यु।
  • कारखाने में मशीनरी संचालन में लापरवाही से श्रमिक की जान जाना।
  • पटाखे या विस्फोटक असावधानी से चलाने से दूसरे की मृत्यु।
  • खेल या साहसिक गतिविधियों में बिना सुरक्षा उपाय के खतरनाक कार्य करना।
  • किसी जानवर को नियंत्रित न कर पाने से दूसरे व्यक्ति की मृत्यु होना।

Conclusion

Section 106 BNS भारतीय न्याय व्यवस्था में एक सशक्त और संतुलित प्रावधान है। यह धारा स्पष्ट करती है कि यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही, उतावलेपन या बेपरवाही के कारण दूसरे की जान जाती है चाहे सड़क पर हो, अस्पताल में हो या किसी अन्य स्थान पर तो कानून उसे बिना दंड के नहीं छोड़ेगा।

पुरानी IPC की तुलना में BNS ने इस अपराध की सज़ा को बढ़ाया है, विशेषकर हिट-एंड-रन के मामलों में 10 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान करके। साथ ही, डॉक्टरों के लिए अलग और उचित प्रावधान रखकर चिकित्सा जगत की चिंताओं को भी ध्यान में रखा गया है।

यह लेख आम नागरिकों को अपने कानूनी अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी कानूनी मामले में किसी योग्य अधिवक्ता (वकील) से परामर्श लेना सदैव उचित रहता है।

Image placeholder

Lorem ipsum amet elit morbi dolor tortor. Vivamus eget mollis nostra ullam corper. Pharetra torquent auctor metus felis nibh velit. Natoque tellus semper taciti nostra. Semper pharetra montes habitant congue integer magnis.

Leave a Comment