क्या आप जानते हैं कि लापरवाही से गाड़ी चलाना, बिना सुरक्षा इंतजाम के निर्माण कार्य करना, या जोखिमभरी आतिशबाजी करना ये सब भारतीय कानून में दंडनीय अपराध हैं? Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 की धारा 125 ऐसे सभी उतावले (rash) और लापरवाह (negligent) कार्यों को अपराध की श्रेणी में रखती है जो दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। यह धारा 1 जुलाई 2024 से लागू है और IPC की धाराओं 336, 337 तथा 338 की जगह लेती है।
इस लेख में आप Section 125 of BNS in Hindi की पूरी जानकारी, सजा का विवरण, जमानत की स्थिति, IPC से अंतर और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के सटीक उत्तर पाएंगे।
Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 की धारा 125 क्या है?
Section 125 BNS, अध्याय VI (मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध) का हिस्सा है। इस धारा के अंतर्गत वह व्यक्ति दंडनीय होगा जो इतनी उतावलेपन (rashness) या उपेक्षा (negligence) से कोई कार्य करे कि उससे किसी अन्य व्यक्ति का जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए।
धारा 125 BNS का मूल पाठ (हिंदी सार):
“जो कोई व्यक्ति इतनी उतावलेपन या उपेक्षा से कोई कार्य करे कि उससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो, तो उसे तीन माह तक के कारावास या ₹2,500 तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।”
धारा 125 के अनुसार कौन सा कार्य दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला माना जाएगा?
इस धारा के तहत निम्नलिखित कार्य दूसरों की जान के लिए खतरनाक माने जाते हैं:
- भीड़-भाड़ वाले इलाके में तेज गति से वाहन चलाना
- निर्माण स्थल पर असुरक्षित औजार या सामग्री छोड़ना
- खतरनाक रसायनों को लापरवाही से संभालना
- सार्वजनिक स्थान पर हवाई फायर (celebratory gunshots) करना
- कारखानों में सुरक्षा मानकों का पालन न करना
महत्वपूर्ण: इस धारा में आशय (intent) की आवश्यकता नहीं है। केवल उतावलापन या लापरवाही ही दंड के लिए पर्याप्त है।
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Section 125(a) BNS क्या है?
Section 125(a) BNS वह उपधारा है जो तब लागू होती है जब लापरवाह कार्य से किसी व्यक्ति को साधारण उपहति (Hurt) होती है। यानी यदि लापरवाही के कारण पीड़ित को शारीरिक चोट लगे, तो यह उपधारा लागू होगी।
Section 125(b) BNS क्या है?
Section 125(b) BNS उस स्थिति में लागू होती है जब उतावले या लापरवाह कार्य के कारण पीड़ित को घोर उपहति (Grievous Hurt) होती है जैसे हड्डी टूटना, आंख या कान की क्षति, स्थायी विकृति आदि।
Section 125 BNS के तहत सजा (Punishment)
नीचे दी गई तालिका में तीनों स्थितियों के लिए दंड का पूरा विवरण है:
| स्थिति | कारावास | जुर्माना |
| सामान्य उतावला/लापरवाह कार्य (कोई चोट नहीं) | 3 माह तक | ₹2,500 तक |
| Section 125(a) उपहति (Hurt) होने पर | 6 माह तक | ₹5,000 तक |
| Section 125(b) घोर उपहति (Grievous Hurt) होने पर | 3 वर्ष तक | ₹10,000 तक |
Section 125(a) BNS Punishment
जहाँ लापरवाह कार्य से साधारण उपहति होती है, वहाँ दोषी को 6 माह तक का कारावास या ₹5,000 तक का जुर्माना या दोनों दिए जा सकते हैं।
Section 125(b) BNS Punishment
जहाँ घोर उपहति हो, वहाँ दोषी को 3 वर्ष तक का कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना या दोनों दिए जा सकते हैं।
अगर कार्य से उपहति (Injury) होती है, तो दंड क्या होगा?
जब लापरवाह कार्य से पीड़ित को शारीरिक चोट (Hurt) लगे, तो दोषी को अधिकतम 6 माह का कारावास और ₹5,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
यदि कार्य से घोर उपहति (Grievous Hurt) होती है, तो क्या दंड होगा?
घोर उपहति की स्थिति में सजा कहीं अधिक कठोर होती है दोषी को 3 वर्ष तक की जेल और ₹10,000 तक का जुर्माना दोनों एक साथ हो सकते हैं।
क्या कारावास और जुर्माना दोनों एक साथ दिए जा सकते हैं?
हाँ। धारा 125 BNS में “या” (or) के साथ “दोनों” (or both) का प्रावधान है। इसका अर्थ है कि न्यायालय विवेकानुसार दोषी को कारावास, जुर्माना, या दोनों एक साथ दे सकता है।
Section 125 BNS Fine Amount
| धारा | अधिकतम जुर्माना |
| धारा 125 (सामान्य) | ₹2,500 |
| Section 125(a) | ₹5,000 |
| Section 125(b) | ₹10,000 |
Section 125(a) BNS Fine Amount
Section 125(a) BNS के अंतर्गत अधिकतम ₹5,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
Section 125(b) BNS Fine Amount
Section 125(b) BNS के अंतर्गत जुर्माने की अधिकतम सीमा ₹10,000 है।
Section 125 BNS Bailable or Not
क्या Section 125(a) BNS जमानती (Bailable) है?
हाँ। Section 125(a) BNS जमानती (Bailable) अपराध है। इसका अर्थ है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जमानत पाने का कानूनी अधिकार है। पुलिस या मजिस्ट्रेट उसे बिना जमानत के हिरासत में नहीं रख सकते, बशर्ते वह व्यक्तिगत बंध पत्र (personal bond) और उचित जमानतदार प्रस्तुत करे।
क्या Section 125(b) BNS जमानती (Bailable) है?
हाँ। Section 125(b) BNS भी जमानती (Bailable) है। घोर उपहति होने पर सजा कठोर है, लेकिन जमानत का अधिकार फिर भी बना रहता है।
क्या यह अपराध संज्ञेय (Cognizable) है या असंज्ञेय (Non-Cognizable)?
Section 125 BNS के अंतर्गत अपराध संज्ञेय (Cognizable) है विशेषतः जब उपहति या घोर उपहति हो। इसका मतलब है कि पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के FIR दर्ज कर सकती है और आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।
| विवरण | Section 125(a) | Section 125(b) |
| जमानती/गैर-जमानती | जमानती (Bailable) | जमानती (Bailable) |
| संज्ञेय/असंज्ञेय | संज्ञेय (Cognizable) | संज्ञेय (Cognizable) |
| विचारणीय न्यायालय | कोई भी मजिस्ट्रेट | कोई भी मजिस्ट्रेट |
Section 125(a) BNS in IPC
BNS Section 125(a) का IPC में समकक्ष प्रावधान कौन सा था?
BNS की धारा 125 IPC की तीन अलग-अलग धाराओं को एकत्रित करके बनाई गई है:
| BNS धारा | IPC की समकक्ष धारा | विवरण |
| Section 125 (सामान्य) | IPC Section 336 | उतावला कार्य जिससे जान को खतरा |
| Section 125(a) | IPC Section 337 | उपहति होने पर |
| Section 125(b) | IPC Section 338 | घोर उपहति होने पर |
BNS और IPC में क्या अंतर है?
BNS 2023 ने IPC की बिखरी हुई धाराओं को एकत्रित कर Section 125 में समेट दिया। सबसे बड़ा बदलाव जुर्माने की राशि में आया है:
- IPC Section 336 में जुर्माना: ₹250 → BNS Section 125 में: ₹2,500 (10 गुना वृद्धि)
- IPC Section 337 में जुर्माना: ₹500 → BNS Section 125(a) में: ₹5,000 (10 गुना वृद्धि)
- IPC Section 338 में जुर्माना: ₹1,000 → BNS Section 125(b) में: ₹10,000 (10 गुना वृद्धि)
- कारावास की अवधि IPC और BNS दोनों में समान रही है।
FAQ’s
क्या लापरवाही से किया गया कार्य भी धारा 125 BNS के अंतर्गत आता है?
हाँ, बिल्कुल। धारा 125 BNS में “उतावलेपन या उपेक्षा” (rashly or negligently) दोनों शब्द शामिल हैं। अपराध के लिए आशय (intent) जरूरी नहीं है केवल लापरवाही ही दंड के लिए पर्याप्त है।
क्या पीड़ित की शिकायत के बिना मामला दर्ज हो सकता है?
हाँ। यह संज्ञेय (Cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज कर सकती है पीड़ित की शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना।
क्या इस अपराध में समझौता किया जा सकता है?
यह अपराध सामान्यतः गैर-शमनीय (Non-Compoundable) है, अर्थात दोनों पक्षों के बीच निजी समझौते से मामला बंद नहीं होता इसे न्यायालय में ही निपटाया जाना होता है।
Conclusion
Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 की धारा Section 125 of BNS in Hindi एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो नागरिकों को सावधान और जिम्मेदार व्यवहार के लिए बाध्य करती है। यह धारा IPC की धाराओं 336, 337 और 338 को एकसाथ समेटती है और जुर्माने की राशि को दस गुना तक बढ़ाती है। सजा का निर्धारण इस आधार पर होता है कि लापरवाही के परिणामस्वरूप कोई चोट हुई या नहीं साधारण उपहति पर 6 माह तक जेल, और घोर उपहति पर 3 वर्ष तक जेल हो सकती है।
यदि आप किसी ऐसे मामले में शामिल हैं चाहे पीड़ित के रूप में या आरोपी के रूप में तो किसी अनुभवी अधिवक्ता से तुरंत परामर्श लेना आवश्यक है। यह लेख केवल कानूनी जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है और इसे कानूनी सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।