भारत में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय न्याय संहिता 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita 2023) को 1 जुलाई 2024 से लागू किया गया है। यह नई संहिता पुराने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code, 1860) की जगह लेती है। इस संहिता की धारा 190 (BNS Section 190) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है जो गैरकानूनी सभाओं (Unlawful Assemblies) और उनसे जुड़े अपराधों में सामूहिक दायित्व (Constructive Liability) को परिभाषित करती है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि Section 190 of BNS in Hindi क्या है, यह कब लागू होती है, इसके आवश्यक तत्व क्या हैं, और इसमें सजा का क्या प्रावधान है तो यह लेख आपके सभी सवालों का जवाब देगा।
गैरकानूनी सभा का प्रत्येक सदस्य सामान्य उद्देश्य के अभियोजन में किए गए अपराध का दोषी है Bharatiya Nyaya Sanhita 2023
धारा 190 का मूल पाठ (Bare Act Text)
भारतीय न्याय संहिता 2023 Section 190 of BNS in Hindi का मूल पाठ इस प्रकार है:
“यदि विधिविरुद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा उस जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में अपराध किया जाता है, या कोई ऐसा अपराध किया जाता है, जिसका किया जाना उस जमाव के सदस्य उस उद्देश्य को अग्रसर करने में संभाव्य जानते थे, तो प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस जमाव का सदस्य है, उस अपराध का दोषी होगा।”
सरल शब्दों में: यदि पाँच या उससे अधिक लोग किसी गैरकानूनी उद्देश्य के लिए एकत्रित होते हैं और उस समूह का कोई एक सदस्य उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए कोई अपराध करता है, तो उस सभा के सभी सदस्य उस अपराध के लिए समान रूप से दोषी माने जाएंगे चाहे उन्होंने स्वयं अपराध किया हो या नहीं।
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BNS धारा 190 और IPC धारा 149 में संबंध
| विशेषता | IPC धारा 149 | BNS धारा 190 |
| संबंधित कानून | भारतीय दंड संहिता, 1860 | भारतीय न्याय संहिता, 2023 |
| लागू होने की तारीख | 1860 से प्रभावी | 1 जुलाई 2024 से प्रभावी |
| विषयवस्तु | गैरकानूनी जमाव में सामूहिक दायित्व | गैरकानूनी जमाव में सामूहिक दायित्व |
| अध्याय | अध्याय VIII (सार्वजनिक शांति के विरुद्ध) | अध्याय XI (सार्वजनिक शांति के विरुद्ध) |
| प्रावधान में बदलाव | मूल प्रावधान | कोई बदलाव नहीं, पूर्णतः समरूप |
नोट: BNS धारा 190 पूरी तरह IPC धारा 149 के समरूप है। सिर्फ धारा संख्या और संहिता का नाम बदला है, कानूनी प्रावधान वही रहे हैं।
धारा 190 के आवश्यक तत्व (Essential Elements)
BNS धारा 190 को लागू करने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना अनिवार्य है:
- गैरकानूनी सभा का गठन (Unlawful Assembly): धारा 189 के अनुसार, कम से कम पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों की एक ऐसी सभा होनी चाहिए जिसका उद्देश्य गैरकानूनी हो।
- सामान्य उद्देश्य की उपस्थिति (Common Object): सभी सदस्यों में एक साझा गैरकानूनी उद्देश्य होना चाहिए जैसे किसी को नुकसान पहुँचाना, संपत्ति नष्ट करना, या कानून तोड़ना।
- किसी सदस्य द्वारा अपराध (Commission of Offence): उस गैरकानूनी सभा के किसी एक सदस्य द्वारा उस सामान्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए कोई अपराध किया जाना चाहिए।
- अपराध के समय सदस्यता (Membership at Time of Offence): आरोपी व्यक्ति उस सभा का सदस्य उसी समय होना चाहिए जब अपराध किया गया हो।
- पूर्वानुमान का ज्ञान (Knowledge of Likely Offence): यदि अपराध सीधे सामान्य उद्देश्य के तहत नहीं किया गया, तो यह साबित होना चाहिए कि सभा के सदस्य जानते थे कि ऐसा अपराध होना संभावित था।
धारा 190 में सजा का प्रावधान (Punishment)
BNS धारा 190 अपने आप में कोई निश्चित सजा नहीं देती। इसमें दोषसिद्धि की सजा वही होगी जो उस अपराध के लिए निर्धारित है जो सभा के सदस्य ने सामान्य उद्देश्य को पूरा करने में किया।
उदाहरण के लिए:
- यदि सभा के एक सदस्य ने हत्या की → सभी सदस्यों पर हत्या का दायित्व
- यदि संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया → आपराधिक क्षति (Criminal Mischief) की सजा
- यदि दंगे हुए → BNS धारा 191/192 के तहत सजा लागू
धारा 190 में “सामान्य उद्देश्य” का क्या अर्थ है?
सामान्य उद्देश्य (Common Object) वह सामूहिक इरादा है जिसके लिए गैरकानूनी सभा गठित की गई होती है। यह “सामान्य इरादे” (Common Intention) से अलग है।
| तुलना बिंदु | सामान्य उद्देश्य (Common Object) | सामान्य इरादा (Common Intention) |
| धारा | BNS 190 | BNS 34 |
| सदस्यों की न्यूनतम संख्या | 5 या अधिक | 2 या अधिक |
| पूर्व योजना | अनिवार्य नहीं | आवश्यक |
| सक्रिय भागीदारी | आवश्यक नहीं | आवश्यक |
धारा 190 के व्यावहारिक उदाहरण (Practical Illustrations)
उदाहरण 1 दंगा (Riot): 20 लोगों का एक समूह किसी सरकारी निर्णय के खिलाफ विरोध करने के लिए इकट्ठा होता है। विरोध हिंसक हो जाता है और कुछ सदस्य सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने लगते हैं। BNS धारा 190 के तहत समूह के सभी सदस्य उस संपत्ति विनाश के लिए दोषी माने जाएंगे, भले ही कुछ ने सीधे तोड़फोड़ न की हो।
उदाहरण 2 आगजनी (Arson): एक गैरकानूनी सभा का उद्देश्य किसी की दुकान नष्ट करना है। यदि सभा का एक सदस्य दुकान में आग लगाता है, तो सभा के बाकी सभी सदस्यों पर आगजनी का आरोप भी लागू होगा।
उदाहरण 3 हमला (Assault): पाँच लोगों का एक गिरोह किसी व्यक्ति को सबक सिखाने के इरादे से घर से निकलता है। उनमें से केवल एक व्यक्ति उस पर हमला करता है। सभी पाँचों पर BNS धारा 190 के तहत हमले का दोष लागू होगा।
धारा 190 का उद्देश्य और महत्व (Purpose and Significance)
BNS धारा 190 का मूल उद्देश्य समाज में सार्वजनिक शांति (Public Tranquility) बनाए रखना है। यह धारा विकर्षण का सिद्धांत (Vicarious Liability) पर आधारित है, जिसके तहत एक व्यक्ति के कार्य को पूरी सभा के कार्य के रूप में माना जाता है।
इस धारा के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- लोगों को गैरकानूनी सभाओं में शामिल होने से हतोत्साहित करना
- सामूहिक हिंसा और दंगों पर प्रभावी नियंत्रण रखना
- किसी को भी “मैंने खुद अपराध नहीं किया” कहकर जिम्मेदारी से बचने से रोकना
- सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने वाले समूहों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना
BNS अध्याय XI में संबंधित धाराएं
BNS की धारा 190, अध्याय XI “सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध” का हिस्सा है। इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण धाराएं इस प्रकार हैं:
| धारा | विषय |
| BNS धारा 189 | गैरकानूनी सभा की परिभाषा (5 या अधिक व्यक्ति) |
| BNS धारा 190 | गैरकानूनी सभा के सदस्यों का सामूहिक दायित्व |
| BNS धारा 191 | दंगा (Rioting) बल प्रयोग या हिंसा द्वारा |
| BNS धारा 192 | घातक हथियारों से दंगा (Rioting with deadly weapons) |
| BNS धारा 193 | गैरकानूनी सभा को तितर-बितर करने में बाधा |
धारा 190 में बचाव के आधार (Defences Available)
यदि कोई व्यक्ति धारा 190 के तहत आरोपित हो, तो निम्नलिखित आधारों पर बचाव संभव है:
- सभा में उपस्थिति का अभाव: यदि अपराध के समय व्यक्ति उस सभा में था ही नहीं।
- सामान्य उद्देश्य से अनजान: यदि व्यक्ति गैरकानूनी उद्देश्य से अनजान था और निर्दोष रूप से वहाँ मौजूद था।
- सभा से अलगाव: यदि अपराध होने से पहले व्यक्ति सभा से अलग हो गया था।
- जबरदस्ती (Compulsion): यदि व्यक्ति को किसी धमकी के कारण वहाँ रहने पर मजबूर किया गया था।
धारा 190 अपराध की प्रकृति (Nature of Offence)
| विशेषता | विवरण |
| संज्ञेय (Cognizable) | नहीं (Non-Cognizable) |
| जमानती (Bailable) | नहीं (Non-Bailable) |
| विचारणीय न्यायालय | अपराध की प्रकृति पर निर्भर |
| समझौता योग्य | नहीं |
महत्वपूर्ण: धारा 190 स्वयं कोई स्वतंत्र अपराध नहीं बनाती यह एक सदस्य के अपराध को सभी सदस्यों पर लागू करने का कानूनी सिद्धांत है।
धारा 190 पर प्रमुख न्यायिक निर्णय (Key Judicial Precedents)
भारतीय न्यायालयों ने IPC धारा 149 (जो अब BNS 190 है) पर समय-समय पर महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं:
- Masalti v. State of U.P. (1964): सुप्रीम कोर्ट ने माना कि धारा 149 का उद्देश्य सामूहिक दायित्व स्थापित करना है। सभी सदस्यों की प्रत्यक्ष भागीदारी जरूरी नहीं।
- Roy Fernandes v. State of Goa (2012): न्यायालय ने स्पष्ट किया कि “सामान्य उद्देश्य” साबित करना आवश्यक है केवल उपस्थिति से दोष नहीं लगता।
- Lalji v. State of U.P. (1989): सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यदि कोई सदस्य मौके पर मौजूद था और उसने सभा नहीं छोड़ी, तो उसे दोषी माना जाएगा।
Conclusion
BNS Section 190 in Hindi भारतीय न्याय संहिता 2023 की यह धारा भारतीय आपराधिक कानून की एक बुनियादी व्यवस्था है। यह धारा स्पष्ट करती है कि गैरकानूनी सभा में शामिल होना अपने आप में एक गंभीर जोखिम है। यदि उस सभा का कोई भी सदस्य सामान्य उद्देश्य को आगे बढ़ाने में कोई अपराध करता है, तो सभी सदस्य समान रूप से दोषी माने जाते हैं।
यह प्रावधान समाज में दंगे, भीड़ हिंसा और सामूहिक अपराधों को रोकने का एक कारगर कानूनी उपकरण है। पुरानी IPC की धारा 149 के समरूप, BNS की धारा 190 ने इस सिद्धांत को नई भारतीय न्याय व्यवस्था में भी बरकरार रखा है।
यदि आप किसी कानूनी मामले में BNS धारा 190 से जुड़े हैं, तो किसी अनुभवी आपराधिक वकील से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।