Section 127 of BNS

Section 127 of BNS in Hindi

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Written by Admin

July 1, 2026

Section 127 of BNS deals with wrongful confinement. It is part of the Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023. This law replaced the old Indian Penal Code on July 1, 2024. Section 127 of BNS protects a person’s freedom to move. It punishes anyone who stops another person from leaving a fixed area. This could be a room, a car, or a building.

Many people confuse wrongful confinement with wrongful restraint. But Section 127 of BNS is different. It applies when someone is completely boxed in, with no way out. The punishment depends on how long the confinement lasts. It can range from one year to five years in jail. Understanding Section 127 of BNS helps you know your rights. It also helps you avoid breaking the law by mistake.

Section 127 of BNS in Hindi: गलत तरीके से कारावास

गलत तरीके से कारावासBharatiya Nyaya Sanhita 2023

धारा 127 के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को इस तरह से रोकता है कि वह एक तय की गई सीमा के बाहर किसी भी दिशा में नहीं जा सकता, तो इसे सदोष परिरोध कहा जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रोक किसी एक दिशा तक सीमित नहीं होती, बल्कि व्यक्ति की पूरी आवाजाही ही बंद कर दी जाती है — यही बात इसे गलत तरीके से रोकना (Wrongful Restraint) से अलग बनाती है।

कानून में दिए गए मुख्य दृष्टांत इस प्रकार हैं:

  • कोई व्यक्ति किसी दूसरे को दीवार से घिरे स्थान में भेजकर बाहर से ताला लगा दे, ताकि वह किसी भी तरफ से बाहर न निकल सके।
  • कोई व्यक्ति भवन के सभी निकास द्वारों पर हथियारबंद लोगों को बिठा दे और धमकी दे कि बाहर निकलने की कोशिश करने पर गोली मार दी जाएगी।

इन दोनों ही स्थितियों में पीड़ित व्यक्ति की गतिविधि पूरी तरह सीमित कर दी जाती है, इसलिए यह अपराध की श्रेणी में आता है।

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धारा 127 के तहत सजा के प्रावधान इस प्रकार वर्गीकृत किए गए हैं:

उप-धाराअपराध की प्रकृतिसजा
धारा 127(2)सामान्य सदोष परिरोध1 वर्ष तक कारावास, या ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों
धारा 127(3)3 या अधिक दिनों तक परिरोध3 वर्ष तक कारावास, या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों
धारा 127(4)10 या अधिक दिनों तक परिरोध5 वर्ष तक कारावास + कम-से-कम ₹10,000 जुर्माना
धारा 127(5)रिट जारी होने पर भी न छोड़नाअतिरिक्त 2 वर्ष तक कारावास + जुर्माना
धारा 127(6)परिरोध की जानकारी छिपानाअतिरिक्त 3 वर्ष तक कारावास + जुर्माना
धारा 127(7)संपत्ति उगाही के इरादे से परिरोध3 वर्ष तक कारावास + जुर्माना
धारा 127(8)संस्वीकृति/सूचना उगाहने के इरादे से परिरोध3 वर्ष तक कारावास + जुर्माना

जैसा कि तालिका से स्पष्ट है, सजा की गंभीरता परिरोध की अवधि और उसके पीछे के इरादे पर निर्भर करती है। जितनी लंबी अवधि तक व्यक्ति को बंद रखा जाता है या जितना गंभीर मकसद (जैसे जबरन वसूली) होता है, सजा उतनी ही सख्त हो जाती है।

धारा 127 – गलत तरीके से किसी को रोकना

धारा 127 को व्यवहारिक रूप से समझने के लिए इसकी कुछ अहम विशेषताओं पर ध्यान देना जरूरी है:

  1. आरोपी के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं होना चाहिए — यदि पुलिस या कोई सक्षम अधिकारी कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी को हिरासत में रखता है, तो वह इस धारा के दायरे में नहीं आता।
  2. पूरी सीमा से बाहर जाने से रोकना — केवल एक दिशा में रोकना पर्याप्त नहीं है; व्यक्ति को हर तरफ से घेरा जाना चाहिए।
  3. मानसिक दबाव भी शामिल है — धमकी देकर या डराकर रोकना भी उतना ही अपराध माना जाता है जितना शारीरिक रूप से बंद करना।
  4. समयावधि सजा तय करती है — कुछ घंटों का परिरोध और 10 दिन से अधिक का परिरोध, दोनों की सजा अलग-अलग होती है।

अक्सर लोग Wrongful Restraint (गलत तरीके से रोकना) और Wrongful Confinement (गलत तरीके से बंदी बनाना) को एक ही समझ लेते हैं। जबकि हकीकत में दोनों अलग अपराध हैं:

बिंदुगलत तरीके से रोकनागलत तरीके से बंदी बनाना
स्वतंत्रता पर असरकेवल एक दिशा में रोकपूरी तरह से घेराबंदी
उदाहरणरास्ता रोकनाकमरे में बंद करना
संबंधित धाराधारा 126धारा 127
सजा की गंभीरताअपेक्षाकृत कमअवधि के अनुसार अधिक हो सकती है

सरल भाषा में

आसान शब्दों में कहें तो — अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे को इस तरह रोक दे कि वह कहीं जा ही न सके, तो यही सदोष परिरोध है। इसमें न सिर्फ शारीरिक रूप से बंद करना आता है, बल्कि डरा-धमकाकर रोकना भी शामिल है।

उदाहरण:

  • किसी को कमरे में बंद करके बाहर जाने का रास्ता बंद कर देना।
  • घर या दुकान के बाहर व्यक्ति खड़ा कर देना और धमकी देना कि बाहर निकलने पर नुकसान पहुँचाया जाएगा।
  • किसी को गाड़ी में बैठाकर दरवाज़े लॉक कर देना, ताकि वह उतर न सके।
  • किराया न देने पर मकान मालिक द्वारा किरायेदार को कमरे में बंद कर देना।

ऐसी हर स्थिति में पीड़ित व्यक्ति पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है, और आरोपी पर धारा 127 के तहत मामला दर्ज हो सकता है।

Conclusion

Section 127 of BNS plays a big role in protecting personal freedom. It makes sure no one can trap another person without a valid legal reason. Whether it’s locking someone in a room or blocking every exit with threats, the law treats it as a serious crime. The punishment grows harsher as the confinement lasts longer. This shows how much importance the law gives to a person’s right to move freely.

Knowing Section 127 of BNS is useful for everyone. It helps people avoid actions that could land them in legal trouble. It also gives victims a clear path to justice. If you or someone you know faces wrongful confinement, don’t stay silent. File a complaint and seek proper legal advice under Section 127 of BNS.

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