Section 307 of BNS

Section 307 of BNS in Hindi

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Written by Admin

June 30, 2026

Section 307 of BNS in Hindi भारतीय न्याय संहिता का एक अहम प्रावधान है। यह धारा चोरी से जुड़े उन मामलों पर लागू होती है जहां चोर पहले से ही हिंसा की तैयारी कर लेता है। अगर कोई व्यक्ति चोरी करते समय हथियार साथ रखता है या साथियों को तैनात करता है ताकि पकड़े जाने पर चोट पहुंचाई जा सके, तो यह धारा उस पर लागू होती है। यह सिर्फ साधारण चोरी से कहीं अधिक गंभीर अपराध माना जाता है।

इस लेख में हम Section 307 of BNS in Hindi को आसान भाषा में समझेंगे। हम इसकी सजा, जमानत के नियम, और जरूरी तत्वों पर बात करेंगे। साथ ही हम इसे पुरानी IPC धारा से भी जोड़कर देखेंगे। अगर आप कानून के छात्र हैं, वकील हैं, या बस अपने अधिकार जानना चाहते हैं, यह लेख आपके लिए उपयोगी रहेगा।

Section 307 of BNS in Hindi: चोरी करने के लिए मृत्यु, चोट या अवरोध उत्पन्न करने की तैयारी के बाद चोरी करना

चोरी करने के लिए मृत्यु, चोट या अवरोध उत्पन्न करने की तैयारी के बाद चोरी करना – Bharatiya Nyaya Sanhita 2023

307. जो कोई, चोरी करने के लिए, या चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए, या चोरी द्वारा ली गई संपत्ति को रखे रखने के लिए, किसी व्यक्ति की मृत्यु, या उसे उपहति या उसका अवरोध कारित करने की, या मृत्यु का, उपहति का या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी करके चोरी करता है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

दृष्टांत:

  • (क) य के कब्जे में की संपत्ति पर क चोरी करता है और यह चोरी करते समय अपने पास अपने वस्त्रों के भीतर एक भरी हुई पिस्तौल रखता है, जिसे उसने य द्वारा प्रतिरोध किए जाने की दशा में य को उपहति करने के लिए अपने पास रखा था। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
  • (ख) क, य की जेब काटता है, और ऐसा करने के लिए अपने कई साथियों को अपने पास इसलिए नियुक्त करता है कि यदि य यह समझ जाए कि क्या हो रहा है और प्रतिरोध करे, या क को पकड़ने का प्रयत्न करे, तो वे य का अवरोध करें। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

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Section 307 BNS Explained in Hindi

Section 307 BNS Explained in Hindi

सरल शब्दों में कहें तो, Section 307 BNS तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति चोरी करने से पहले ही अपने मन में यह योजना बना लेता है कि अगर पीड़ित विरोध करे या उसे पकड़ने की कोशिश करे, तो उसे चोट पहुंचाई जाएगी, मार दिया जाएगा या उसे रोका जाएगा। चाहे चोरी के दौरान वास्तव में किसी को चोट लगे या न लगे, सिर्फ ऐसी तैयारी कर लेना ही इस धारा के तहत अपराध माना जाता है।

इस धारा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो चोर हथियार लेकर या साथियों के समूह के साथ हिंसा की योजना बनाकर चोरी करने जाते हैं, उन्हें साधारण चोरी करने वालों से अधिक कड़ी सजा मिले। यह कानून की मंशा को दर्शाता है कि संपत्ति की सुरक्षा के साथ-साथ व्यक्ति की जान-माल की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए।

Essential Ingredients of Section 307 BNS

Section 307 BNS के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक तत्वों (essential ingredients) का होना जरूरी है:

  1. चोरी की कार्रवाई – अभियुक्त ने वास्तव में चोरी की हो, यानी संपत्ति को बेईमानी से हटाया हो।
  2. पूर्व तैयारी – चोरी करने से पहले, उसके दौरान भागने के लिए, या चुराई गई संपत्ति को अपने पास रखने के लिए मृत्यु, चोट या अवरोध कारित करने की तैयारी की गई हो।
  3. आशय या इरादा – यह तैयारी जानबूझकर और सोच-समझकर की गई हो, न कि संयोगवश।
  4. भय उत्पन्न करना भी पर्याप्त – वास्तविक चोट या मृत्यु कारित होना आवश्यक नहीं; केवल भय उत्पन्न करने की तैयारी भी इस धारा के अंतर्गत आती है।
  5. साधन का उपयोग – हथियार रखना, साथियों को तैनात करना, या किसी अन्य प्रकार से बल प्रयोग की योजना बनाना इस अपराध का हिस्सा माना जाता है।

Section 307 BNS Punishment

Section 307 BNS के तहत दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित सजा का प्रावधान है:

विवरणप्रावधान
कारावासकठिन कारावास (Rigorous Imprisonment)
अधिकतम अवधि10 वर्ष तक
जुर्मानादायी (अनिवार्य)
न्यूनतम सजानिर्धारित नहीं, न्यायालय के विवेक पर निर्भर

यह सजा साधारण चोरी (जिसमें अधिकतम 3 वर्ष की सजा होती है) की तुलना में काफी अधिक कठोर है, क्योंकि इसमें हिंसा की संभावित मंशा शामिल होती है।

Section 307 BNS Bailable or Non-Bailable

Section 307 BNS Bailable or Non-Bailable

Section 307 BNS एक गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध है। इसका अर्थ यह है कि अभियुक्त को जमानत पाने का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होता, बल्कि उसे न्यायालय के समक्ष जमानत याचिका दाखिल करनी होती है, और न्यायालय मामले की गंभीरता, सबूतों और अन्य परिस्थितियों को देखकर जमानत देने या न देने का निर्णय लेता है।

Section 307 BNS Cognizable or Non-Cognizable

यह धारा संज्ञेय (Cognizable) अपराध की श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि पुलिस बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकती है और जांच शुरू कर सकती है। संज्ञेय अपराध होने के कारण पीड़ित या शिकायतकर्ता सीधे FIR दर्ज करा सकता है।

Section 307 BNS Triable by Which Court

Section 307 BNS के तहत अपराध मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (Magistrate of the First Class) के न्यायालय द्वारा विचारणीय (triable) है। चूंकि अधिकतम सजा 10 वर्ष तक की कठिन कारावास है, इसलिए मामले की गंभीरता के अनुसार सुनवाई की प्रक्रिया तय की जाती है।

Section 307 BNS Examples

नीचे कुछ व्यावहारिक उदाहरण दिए गए हैं जिनसे यह धारा बेहतर समझी जा सकती है:

  • एक व्यक्ति किसी घर में चोरी करने जाता है और अपने साथ चाकू लेकर जाता है ताकि अगर घर का मालिक जाग जाए तो उसे डराया या चोट पहुंचाई जा सके।
  • कुछ लोग मिलकर किसी की जेब काटने की योजना बनाते हैं और अपने साथियों को इसलिए तैनात करते हैं कि अगर पीड़ित विरोध करे तो उसे रोका जा सके।
  • कोई चोर भागने के रास्ते में संभावित बाधा को दूर करने के लिए पहले से हथियार छिपाकर रखता है।

इन सभी मामलों में, चाहे वास्तविक हिंसा हुई हो या नहीं, अभियुक्त पर Section 307 BNS के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

Section 307 BNS vs IPC

नीचे दी गई तालिका में Section 307 BNS की तुलना इसके संबंधित IPC प्रावधान से की गई है:

बिंदुSection 307 BNSसंबंधित IPC धारा
विषयचोरी के लिए मृत्यु/चोट/अवरोध की तैयारीधारा 382 IPC
सजा10 वर्ष तक कठिन कारावास + जुर्माना10 वर्ष तक कठिन कारावास + जुर्माना
जमानतगैर-जमानतीगैर-जमानती
संज्ञेयतासंज्ञेयसंज्ञेय
मूल मंशासमान रहती है, भाषा को सरल और स्पष्ट किया गयापुरानी भाषा शैली

ध्यान देने योग्य बात यह है कि BNS में इस प्रावधान की मूल भावना और सजा लगभग पुरानी IPC धारा जैसी ही रखी गई है, केवल भाषा को आधुनिक और स्पष्ट बनाया गया है ताकि आम नागरिकों के लिए कानून को समझना आसान हो।

IPC to BNS PDF

यदि आप IPC की सभी धाराओं का BNS में मैपिंग एक साथ देखना चाहते हैं, तो आधिकारिक IPC to BNS conversion चार्ट या PDF का उपयोग करें। यह दस्तावेज़ वकीलों, कानून के छात्रों और आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी है, क्योंकि इससे यह आसानी से पता चलता है कि कौन सी पुरानी IPC धारा अब किस नई BNS धारा के अंतर्गत आती है। ऐसे चार्ट सरकारी कानूनी पोर्टल्स और विश्वसनीय कानूनी वेबसाइटों पर उपलब्ध होते हैं।

FAQ’s

What is Section 307 of BNS?

Section 307 BNS उस स्थिति से संबंधित है जब कोई व्यक्ति चोरी करने के लिए, भागने के लिए, या संपत्ति रखने के लिए मृत्यु, चोट या अवरोध उत्पन्न करने की पूर्व तैयारी करके चोरी करता है।

What is the punishment under Section 307 BNS?

दोषी को 10 वर्ष तक की कठिन कारावास की सजा और जुर्माना, दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।

Is Section 307 BNS bailable or non-bailable?

यह एक गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध है, जिसमें जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है।

Which court tries offences under Section 307 BNS?

इस अपराध की सुनवाई मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के न्यायालय द्वारा की जाती है।

What is the IPC equivalent of Section 307 BNS?

Section 307 BNS, IPC की धारा 382 के समकक्ष है, जो इसी प्रकार के अपराध को परिभाषित करती थी।

Conclusion

Section 307 of BNS यह स्पष्ट करती है कि कानून केवल संपत्ति की चोरी को ही नहीं, बल्कि चोरी के दौरान हिंसा की संभावित मंशा को भी गंभीरता से लेता है। जब कोई व्यक्ति चोरी करने से पहले ही मृत्यु, चोट या अवरोध उत्पन्न करने की तैयारी कर लेता है, तो यह सामान्य चोरी से कहीं अधिक खतरनाक अपराध बन जाता है, और इसीलिए कानून ने इसके लिए 10 वर्ष तक की कठोर सजा निर्धारित की है।

यह धारा न केवल पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि अपराधियों को भी यह स्पष्ट संदेश देती है कि चोरी के दौरान हथियार या बल प्रयोग की योजना बनाना अत्यंत गंभीर परिणामों को आमंत्रित कर सकता है। Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 के तहत यह प्रावधान पुराने IPC कानून की भावना को बनाए रखते हुए भाषा को अधिक सरल और स्पष्ट बनाता है, जिससे न्याय प्रणाली आम नागरिकों के लिए और अधिक सुलभ बन सके।

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