Section 105 of BNS

Section 105 of BNS in Hindi

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Written by Admin

June 4, 2026

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 को 1 जुलाई 2024 से पूरे भारत में लागू किया गया। यह कानून पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 की जगह आया है। इस नई संहिता में Section 105 of BNS एक बेहद महत्वपूर्ण धारा है, जो गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide Not Amounting to Murder) के लिए सजा का प्रावधान करती है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि BNS की धारा 105 क्या है, इसमें क्या सजा मिलती है, यह जमानती है या नहीं, और IPC की कौन सी धारा से यह बदली है — तो यह लेख आपके लिए है। आइए विस्तार से समझते हैं।

Section 105 of BNS in Hindi: गैर इरादतन हत्या के लिए सजा

BNS की धारा 105 को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 के स्थान पर लाया गया है। इसमें ऐसे मामलों को कवर किया जाता है जहाँ किसी व्यक्ति की मृत्यु तो होती है, लेकिन आरोपी का पहले से हत्या करने का कोई इरादा नहीं था।

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गैर इरादतन हत्या के लिए सजा Bharatiya Nyaya Sanhita 2023

धारा 105 का मूल पाठ (Bare Act)

धारा 105 — हत्या की श्रेणी में न आने वाले आपराधिक मानव वध के लिए दंड:

जो कोई व्यक्ति ऐसा आपराधिक मानव वध करेगा जो हत्या की श्रेणी में नहीं आता, तो उसे निम्नलिखित दंड दिया जाएगा:

  • भाग (I): यदि कार्य जानबूझकर (Intentionally) मृत्यु कारित करने के इरादे से किया गया हो, तो आजीवन कारावास या 5 से 10 वर्ष तक का कारावास, और जुर्माना।
  • भाग (II): यदि कार्य बिना मृत्यु के इरादे के (यानी केवल शारीरिक क्षति पहुँचाने के इरादे से या जानते हुए) किया गया हो, तो 10 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना, या दोनों।

गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide) क्या होती है?

गैर इरादतन हत्या वह स्थिति होती है जब कोई व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है जिसके परिणामस्वरूप किसी दूसरे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है — लेकिन उसका पहले से हत्या करने का इरादा (Intention) नहीं था। भारतीय न्याय संहिता की धारा 100 में आपराधिक मानव वध की परिभाषा दी गई है।

सरल भाषा में उदाहरण:

  • कोई व्यक्ति गुस्से में आकर किसी को थप्पड़ मार देता है, वह व्यक्ति गिर जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है — यह गैर इरादतन हत्या है।
  • कोई व्यक्ति लापरवाही से तेज रफ्तार में वाहन चलाता है और किसी की जान चली जाती है — इस स्थिति में भी धारा 105 लागू हो सकती है।
  • बाजार में जगह को लेकर विवाद के दौरान डंडे से वार करने पर यदि मृत्यु हो जाए।

हत्या (Murder) और गैर इरादतन हत्या में अंतर

यह समझना बहुत जरूरी है कि हत्या (Murder — BNS धारा 101/103) और गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide — BNS धारा 100/105) में क्या फर्क है।

विषयहत्या (Murder)गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide)
इरादापहले से सोची-समझी योजना के साथ हत्याहत्या का पूर्व इरादा नहीं
BNS धाराधारा 101 (परिभाषा), धारा 103 (सजा)धारा 100 (परिभाषा), धारा 105 (सजा)
IPC समकक्षधारा 302धारा 304
सजामृत्युदंड या आजीवन कारावास10 वर्ष से आजीवन कारावास
प्रकृतिअधिक गंभीर अपराधअपेक्षाकृत कम गंभीर (पर फिर भी दंडनीय)

धारा 105 के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients)

BNS की धारा 105 को लागू करने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना जरूरी है:

  1. मृत्यु का कारण बनना — आरोपी के कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई हो।
  2. मृत्यु का पूर्व इरादा न होना — आरोपी ने पहले से हत्या की योजना नहीं बनाई थी।
  3. जानकारी का होना — आरोपी को यह ज्ञान था कि उसके कार्य से मृत्यु या गंभीर चोट हो सकती है।
  4. कार्य का आपराधिक होना — कार्य ऐसा हो जो कानूनी रूप से दंडनीय हो।

BNS धारा 105 में सजा का विवरण

स्थितिसजा
जानबूझकर मृत्यु कारित करने के इरादे से किया गया कार्यआजीवन कारावास या 5 से 10 वर्ष + जुर्माना
बिना मृत्यु के इरादे के (केवल शारीरिक क्षति के इरादे से)10 वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों

जुर्माने की राशि: धारा 105 में जुर्माने की कोई निश्चित राशि नहीं दी गई है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश स्वयं जुर्माना तय करता है।

धारा 105 BNS — अपराध की प्रकृति (Nature of Offence)

विशेषताविवरण
अपराध का प्रकारसंज्ञेय (Cognizable)
जमानतगैर-जमानती (Non-Bailable)
किस न्यायालय में सुनवाईसेशन कोर्ट (Sessions Court)
समझौता (Compoundable)नहीं

संज्ञेय अपराध का अर्थ है — पुलिस बिना न्यायालय के वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।

गैर-जमानती अपराध का अर्थ है — पुलिस थाने से सीधे जमानत नहीं मिलती; न्यायालय तय करता है कि जमानत मिलेगी या नहीं।

धारा 105 के अंतर्गत आने वाले मुख्य अपराध

निम्नलिखित स्थितियाँ BNS की धारा 105 के दायरे में आ सकती हैं:

  • लापरवाही से वाहन चलाना जिससे किसी की मृत्यु हो जाए
  • गुस्से में किसी पर भारी वस्तु से हमला करना जिससे मृत्यु हो
  • ऊँचाई से कोई भारी वस्तु गिराना जो किसी पर जा गिरे
  • किसी को जानबूझकर भूखा-प्यासा रखना जिससे मृत्यु हो
  • लड़ाई के दौरान किसी को धक्का देने से मृत्यु होना
  • समारोह में हथियार चलाने से अनजाने में किसी की मौत
  • खेल के दौरान लापरवाही से शारीरिक क्षति पहुँचाना जिससे मृत्यु हो

वास्तविक जीवन का उदाहरण

उदाहरण 1: राजेश और सुरेश पड़ोसी थे। पानी की पाइपलाइन को लेकर दोनों में विवाद हो गया। गुस्से में राजेश ने सुरेश को एक पत्थर से मारा। सुरेश गंभीर रूप से घायल हो गया और कुछ घंटों बाद अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। राजेश का पहले से हत्या करने का कोई इरादा नहीं था। ऐसे में BNS धारा 105 के तहत राजेश पर मामला दर्ज होगा और उसे 5 से 10 वर्ष या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

उदाहरण 2: मोहन एक ट्रक चालक है। वह तेज रफ्तार में ट्रक चला रहा था और गलती से एक व्यक्ति को टक्कर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई। मोहन को पता था कि तेज रफ्तार खतरनाक है, फिर भी उसने सावधानी नहीं बरती। इस मामले में BNS की धारा 105 के भाग II के तहत कार्यवाही होगी।

IPC धारा 304 और BNS धारा 105 में तुलना

विषयIPC धारा 304BNS धारा 105
लागू होने की तारीख1860 से 30 जून 2024 तक1 जुलाई 2024 से
अपराधCulpable Homicide Not Amounting to MurderCulpable Homicide Not Amounting to Murder
सजा (भाग I)आजीवन कारावास या 10 वर्ष + जुर्मानाआजीवन कारावास या 5-10 वर्ष + जुर्माना
सजा (भाग II)10 वर्ष या जुर्माना10 वर्ष या जुर्माना
मुख्य बदलावभाग I में न्यूनतम 5 वर्ष की सजा का स्पष्ट उल्लेख

धारा 105 BNS में जमानत (Bail) कैसे मिलती है?

चूँकि यह एक गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध है, इसलिए आरोपी को थाने से जमानत नहीं मिलती। जमानत के लिए सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट में अर्जी देनी होती है। न्यायालय निम्नलिखित बातों पर विचार करके जमानत दे सकता है:

  • आरोपी का आपराधिक इतिहास
  • सबूत नष्ट करने की संभावना
  • गवाहों को डराने का खतरा
  • अपराध की गंभीरता

आरोपी के बचाव के उपाय (Defence)

यदि किसी व्यक्ति पर धारा 105 BNS के तहत मामला दर्ज हो, तो निम्न बचाव के विकल्प उपलब्ध हैं:

  1. आत्मरक्षा (Self Defence) — यदि कार्य आत्मरक्षा में किया गया था
  2. दुर्घटना (Accident) — यदि मृत्यु पूरी तरह अनायास हुई
  3. सहमति (Consent) — कुछ विशेष परिस्थितियों में पीड़ित की सहमति
  4. मानसिक असंतुलन — यदि आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ था
  5. गवाह और सबूत — अपने पक्ष में मजबूत साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करें

किसी भी स्थिति में एक अनुभवी आपराधिक वकील (Criminal Lawyer) की सहायता लेना अनिवार्य है।

संबंधित BNS धाराएँ

धाराविषय
BNS 100आपराधिक मानव वध की परिभाषा
BNS 101हत्या की परिभाषा
BNS 103हत्या के लिए सजा
BNS 104आजीवन दंडित व्यक्ति द्वारा हत्या
BNS 105गैर इरादतन हत्या की सजा (यह धारा)
BNS 106लापरवाही से मौत के लिए सजा

Conclusion

BNS की धारा 105 भारतीय न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उन मामलों को संबोधित करती है जहाँ किसी व्यक्ति की जान तो जाती है, लेकिन आरोपी का हत्या करने का कोई पूर्व इरादा नहीं था। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति अपनी लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से किसी की जान लेने के बाद कानून की पकड़ से नहीं बच सकता।

IPC की धारा 304 की जगह आई इस BNS धारा 105 में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं, जैसे कि भाग I में न्यूनतम 5 वर्ष की सजा का स्पष्ट उल्लेख। यह कानून पुराने औपनिवेशिक कानून से ज्यादा स्पष्ट और व्यावहारिक है।

यदि आप या आपका कोई परिचित इस धारा से संबंधित किसी मामले में फँसा हो, तो तुरंत एक अनुभवी आपराधिक वकील से परामर्श लें। कानूनी जागरूकता ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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