124 BNS

124 BNS in Hindi: धारा 124 क्या है, सजा और कानूनी प्रावधान

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Written by Admin

August 15, 2026

124 BNS in Hindi भारतीय न्याय संहिता, 2023 की एक महत्वपूर्ण धारा है। यह धारा मुख्य रूप से एसिड या अन्य समान पदार्थों के प्रयोग से किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचाने से संबंधित है। इसमें शरीर को स्थायी या आंशिक नुकसान, विकृति, जलाना, अंग-भंग, चेहरा बिगाड़ना, अपंगता या गंभीर चोट पहुँचाने जैसे कृत्यों को शामिल किया गया है। धारा 124 में अपराध की गंभीरता के अनुसार कड़ी सजा का प्रावधान है।

यह प्रावधान भारतीय न्याय संहिता के मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराधों से संबंधित अध्याय में आता है और पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 326A और 326B से संबंधित प्रावधानों को नए कानून में समाहित करता है।

Table of Contents

124 BNS क्या है?

BNS धारा 124 का आधिकारिक विषय है—“Voluntarily causing grievous hurt by use of acid, etc.”, अर्थात एसिड आदि के प्रयोग से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना

सरल शब्दों में, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति पर एसिड डालता या फेंकता है, एसिड पिलाता या किसी अन्य तरीके से ऐसा नुकसान करता है जिससे शरीर को स्थायी या आंशिक क्षति, विकृति, जलने, अंग-भंग, चेहरे के बिगड़ने, अपंगता या गंभीर चोट जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो मामला धारा 124 के अंतर्गत आ सकता है। इसमें उस व्यक्ति की मंशा या यह ज्ञान भी महत्वपूर्ण है कि उसके कृत्य से ऐसी गंभीर चोट होने की संभावना है।

BNS धारा 124 का मुख्य प्रावधान

धारा 124 को मुख्य रूप से दो भागों में समझा जा सकता है—धारा 124(1) और धारा 124(2)

धारा 124(1) BNS

धारा 124(1) उस स्थिति से संबंधित है जिसमें आरोपी के कृत्य से वास्तव में गंभीर प्रकार की शारीरिक क्षति होती है।

इसमें निम्न प्रकार की चोट या नुकसान शामिल हो सकते हैं:

  • शरीर के किसी हिस्से को स्थायी या आंशिक नुकसान।
  • शरीर में स्थायी या आंशिक विकृति।
  • शरीर को जलाना।
  • अंग को नुकसान पहुँचाना या अपंग करना।
  • शरीर के किसी हिस्से को विकृत या disfigure करना।
  • गंभीर चोट पहुँचाना।
  • व्यक्ति को स्थायी vegetative state में पहुँचा देना।
  • एसिड फेंककर या एसिड का प्रयोग करके ऐसी चोट पहुँचाना।
  • किसी अन्य माध्यम से ऐसी गंभीर चोट पहुँचाना, जब आरोपी का उद्देश्य ऐसा नुकसान करना हो या उसे पता हो कि ऐसा नुकसान होने की संभावना है।

धारा 124(1) में सजा

इस अपराध के लिए कम से कम 10 वर्ष का कारावास निर्धारित है। यह सजा आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है। इसके अलावा आरोपी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

कानून में यह भी कहा गया है कि लगाया गया जुर्माना पीड़ित के उपचार के चिकित्सा खर्चों को पूरा करने के लिए उचित और न्यायसंगत होना चाहिए। इस उपधारा के तहत लगाया गया जुर्माना पीड़ित को दिया जाना है।

धारा 124(2) BNS क्या है?

धारा 124(2) मुख्य रूप से एसिड फेंकने या फेंकने का प्रयास करने तथा एसिड देने या देने का प्रयास करने जैसी स्थिति से संबंधित है, जब आरोपी का उद्देश्य स्थायी या आंशिक नुकसान, विकृति, जलने, अंग-भंग, disfigurement, disability या grievous hurt पहुँचाना हो।

इसका महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केवल अंतिम रूप से गंभीर चोट होना ही आवश्यक नहीं है। यदि आरोपी निर्धारित गंभीर नुकसान पहुँचाने के इरादे से एसिड फेंकने या इस्तेमाल करने का प्रयास करता है, तो धारा 124(2) लागू हो सकती है।

धारा 124(2) में सजा

इस उपधारा के तहत कम से कम 5 वर्ष का कारावास हो सकता है, जो 7 वर्ष तक बढ़ सकता है, और आरोपी जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

धारा 124 BNS में “एसिड” का अर्थ

धारा 124 में “acid” की परिभाषा केवल सामान्य रूप से पहचाने जाने वाले एसिड तक सीमित नहीं है।

इसमें ऐसा पदार्थ शामिल है जिसमें:

  • अम्लीय प्रकृति हो;
  • संक्षारक (corrosive) प्रकृति हो;
  • जलाने वाली प्रकृति हो;
  • ऐसा पदार्थ शारीरिक चोट पैदा करने में सक्षम हो;
  • चोट के कारण निशान या disfigurement हो सकता हो;
  • अस्थायी या स्थायी disability हो सकती हो।

इसलिए धारा 124 का उद्देश्य केवल किसी विशेष रासायनिक पदार्थ को अपराध के दायरे में लाना नहीं, बल्कि ऐसे corrosive या burning substances से होने वाली गंभीर शारीरिक क्षति को दंडित करना है।

धारा 124 BNS में “स्थायी नुकसान” का क्या मतलब है?

इस धारा में permanent या partial damage, deformity और permanent vegetative state का उल्लेख किया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून के अनुसार ऐसी क्षति का पूरी तरह irreversible होना आवश्यक नहीं है

अर्थात यदि चोट या विकृति का उपचार संभव है, तब भी केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि धारा 124 लागू नहीं होगी। मामले के तथ्यों, चोट की प्रकृति, आरोपी की मंशा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून लागू किया जाता है।

124 BNS और Acid Attack

एसिड अटैक किसी व्यक्ति के शरीर के साथ-साथ उसके चेहरे, दृष्टि, त्वचा और सामान्य जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इसी कारण BNS में इसके लिए कठोर दंड का प्रावधान रखा गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की जानकारी के अनुसार BNS की धारा 124 एसिड या अन्य corrosive/burning substance के माध्यम से गंभीर चोट पहुँचाने वाले मामलों से संबंधित है।

धारा 124 के तहत अपराध केवल किसी महिला के विरुद्ध किए गए एसिड अटैक तक सीमित नहीं है। प्रावधान “any person” के शरीर को होने वाली ऐसी गंभीर क्षति पर लागू होता है।

124 BNS में अपराध के लिए किन बातों पर ध्यान दिया जाता है?

किसी मामले में धारा 124 लागू होने का निर्धारण केवल यह देखकर नहीं किया जाता कि कोई पदार्थ इस्तेमाल हुआ था। जांच में परिस्थितियों और साक्ष्यों का महत्व होता है।

मुख्य रूप से ये बातें महत्वपूर्ण हो सकती हैं:

  1. आरोपी ने वास्तव में क्या किया?
  2. किस पदार्थ का इस्तेमाल किया गया?
  3. चोट किस प्रकार की थी?
  4. शरीर के किस हिस्से को नुकसान हुआ?
  5. नुकसान स्थायी, आंशिक या गंभीर प्रकृति का था या नहीं?
  6. आरोपी की मंशा क्या थी?
  7. क्या आरोपी को ऐसी चोट होने की संभावना का ज्ञान था?
  8. क्या आरोपी ने अपराध करने का प्रयास किया था?
  9. मेडिकल रिपोर्ट में चोट की प्रकृति क्या बताई गई है?
  10. घटना से संबंधित अन्य साक्ष्य क्या हैं?

इन सभी तथ्यों का मूल्यांकन जांच और न्यायिक प्रक्रिया में किया जाता है।

124 BNS की सजा एक नजर में

प्रावधानअपराध की प्रकृतिसजा
धारा 124(1)एसिड आदि से गंभीर चोट, स्थायी/आंशिक नुकसान, विकृति या disability आदिकम से कम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक + जुर्माना
धारा 124(2)एसिड फेंकना/फेंकने का प्रयास या एसिड देने/देने का प्रयास, गंभीर नुकसान के इरादे से5 से 7 वर्ष तक कारावास + जुर्माना

उपधारा 124(1) में जुर्माना पीड़ित के चिकित्सा खर्चों को पूरा करने के लिए उचित और न्यायसंगत होना चाहिए तथा लगाया गया जुर्माना पीड़ित को दिया जाना है।

124 BNS Cognizable है या Non-Cognizable?

उपलब्ध कानूनी संदर्भों के अनुसार BNS धारा 124 के तहत अपराध cognizable है। इसका अर्थ है कि पुलिस कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऐसे अपराध की जांच कर सकती है और मामले की परिस्थितियों के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।

हालांकि किसी वास्तविक मामले में FIR, गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया मामले के तथ्यों तथा लागू प्रक्रियात्मक कानून पर निर्भर करती है।

124 BNS Bailable है या Non-Bailable?

BNS धारा 124 के अपराध को non-bailable बताया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को किसी भी परिस्थिति में जमानत नहीं मिल सकती। Non-bailable अपराध में जमानत अदालत के विवेक और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होती है।

किसी वास्तविक मामले में जमानत की स्थिति जानने के लिए FIR की धाराओं, आरोपों, केस रिकॉर्ड और अदालत की कार्यवाही को देखना आवश्यक होता है।

124 BNS का Trial किस Court में होता है?

उपलब्ध कानूनी संदर्भों के अनुसार BNS Section 124 का trial Court of Session में होता है

व्यवहार में किसी मामले की कार्यवाही संबंधित न्यायालय, क्षेत्राधिकार और प्रक्रियात्मक परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ती है।

IPC की कौन-सी धाराओं से संबंधित है?

BNS लागू होने से पहले एसिड अटैक से संबंधित प्रमुख IPC provisions में धारा 326A और 326B शामिल थीं। NCRB द्वारा उपलब्ध BNS comparative material में BNS 124(1) और 124(2) के सामने क्रमशः IPC 326A और 326B का उल्लेख किया गया है।

इसलिए सामान्य तुलना में:

  • BNS 124(1) → IPC 326A
  • BNS 124(2) → IPC 326B

यह तुलना पुराने और नए कानून के बीच प्रावधानों को समझने के लिए उपयोगी है, लेकिन किसी पुराने अपराध पर कौन-सा कानून लागू होगा, यह घटना की तारीख और लागू transitional provisions पर निर्भर कर सकता है।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए किसी व्यक्ति ने जानबूझकर दूसरे व्यक्ति पर corrosive substance फेंका और इससे पीड़ित के चेहरे पर गंभीर जलन तथा स्थायी या आंशिक विकृति हो गई।

ऐसी परिस्थिति में धारा 124(1) के तत्वों पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि चोट गंभीर है और शरीर को नुकसान या disfigurement हुआ है।

दूसरे उदाहरण में, कोई व्यक्ति किसी पर एसिड फेंकने की कोशिश करता है लेकिन हमला सफल नहीं होता। यदि अभियोजन यह स्थापित कर सके कि आरोपी का उद्देश्य गंभीर शारीरिक नुकसान पहुँचाना था, तो धारा 124(2) के प्रावधान प्रासंगिक हो सकते हैं।

हालांकि वास्तविक मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष केवल उदाहरण से तय नहीं किया जा सकता। पुलिस जांच, मेडिकल साक्ष्य, गवाहों और अन्य परिस्थितियों का मूल्यांकन आवश्यक होता है।

धारा 124 BNS का उद्देश्य

धारा 124 का मुख्य उद्देश्य एसिड और समान corrosive या burning substances के माध्यम से होने वाली गंभीर शारीरिक क्षति को कठोर दंड के दायरे में लाना है।

इस प्रावधान में केवल सफल हमला ही नहीं, बल्कि निर्धारित गंभीर नुकसान पहुँचाने के इरादे से किए गए प्रयास को भी अलग से दंडित किया गया है। साथ ही, वास्तविक गंभीर चोट वाले मामले में न्यूनतम 10 वर्ष की सजा और victim-oriented fine का प्रावधान इसे एक कठोर आपराधिक प्रावधान बनाता है।

124 BNS से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

124 BNS क्या है?

124 BNS भारतीय न्याय संहिता, 2023 की वह धारा है जो एसिड आदि के प्रयोग से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने से संबंधित है।

124 BNS में कितनी सजा है?

धारा 124(1) में कम से कम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। धारा 124(2) में 5 से 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

क्या 124 BNS में जमानत मिल सकती है?

यह non-bailable अपराध है। जमानत का निर्णय संबंधित अदालत द्वारा मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।

क्या 124 BNS केवल एसिड अटैक के लिए है?

धारा में एसिड के साथ-साथ ऐसे अन्य माध्यमों को भी शामिल किया गया है जिनसे संबंधित गंभीर चोट या नुकसान जानबूझकर या आवश्यक ज्ञान के साथ पहुँचाया जाता है।

क्या एसिड फेंकने की कोशिश पर भी धारा 124 लग सकती है?

हाँ। धारा 124(2) एसिड फेंकने या फेंकने के प्रयास तथा एसिड देने या देने के प्रयास को कवर करती है, यदि निर्धारित गंभीर नुकसान पहुँचाने का इरादा हो।

124 BNS में जुर्माना किसे मिलता है?

धारा 124(1) में लगाया गया जुर्माना चिकित्सा खर्चों को पूरा करने के लिए उचित होना चाहिए और कानून के अनुसार वह जुर्माना पीड़ित को दिया जाना है।

निष्कर्ष

124 BNS in Hindi को सरल शब्दों में समझें तो यह भारतीय न्याय संहिता की एक महत्वपूर्ण धारा है जो एसिड या समान साधनों से गंभीर शारीरिक नुकसान पहुँचाने वाले अपराधों पर लागू होती है। धारा 124(1) में वास्तविक गंभीर चोट, स्थायी या आंशिक नुकसान, विकृति, disability या permanent vegetative state जैसी परिस्थितियों के लिए कम से कम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। वहीं धारा 124(2) गंभीर नुकसान पहुँचाने के इरादे से एसिड फेंकने या उसका प्रयास करने जैसे कृत्यों को दंडित करती है।

यह जानकारी सामान्य कानूनी समझ के लिए है। किसी वास्तविक FIR, गिरफ्तारी, जमानत या मुकदमे में धारा 124 BNS की लागू होने की स्थिति मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। ऐसे मामले में योग्य आपराधिक कानून विशेषज्ञ से व्यक्तिगत कानूनी सलाह लेना उचित है।

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