जब कोई जानबूझकर धोखा देता है और उससे किसी को बड़ा नुकसान होता है — तो कानून चुप नहीं बैठता। धारा 318(4) BNS क्या है? धारा है जो ऐसे धोखेबाजों पर लगती है जिन्होंने पैसे, संपत्ति या प्रतिष्ठा का बड़ा नुकसान पहुँचाया हो। पहले ये IPC 420 के नाम से जानी जाती थी — अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) में इसे 318(4) कर दिया गया है। भाषा बदली, लेकिन सख्ती वही रही।
ये cheating offence under BNS सिर्फ छोटी-मोटी ठगी के लिए नहीं है। इसमें वो मामले आते हैं जहाँ धोखे का इरादा साफ हो और नुकसान भी बड़ा हो। अगर तुम इस धारा को समझना चाहते हो — चाहे शिकार हो या आरोपी — तो ये आर्टिकल तुम्हारे लिए ही है।
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धारा 318(4) BNS कब लगती है? (रोज़मर्रा के 10 उदाहरण)
धारा 318(4) BNS तब लगती है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठ बोलकर या फर्जी तरीके से किसी को बड़ा नुकसान पहुँचाता है। नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं — जान, संपत्ति या प्रतिष्ठा का भी हो सकता है। धोखाधड़ी का केस तभी बनता है जब इरादा और नुकसान — दोनों साबित हों।
यहाँ 10 असली उदाहरण हैं जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में देखने को मिलते हैं:
- फर्जी प्रॉपर्टी फ्रॉड — फर्जी डीड दिखाकर 40-50 लाख रुपये लेकर जमीन न देना
- fake job fraud — “सरकारी नौकरी लगवा देंगे” कहकर लाखों रुपये लेना और गायब हो जाना
- ऑनलाइन लोन फ्रॉड — फर्जी ऐप से लोन के नाम पर हजारों रुपये ऐंठना
- investment scam India — फर्जी कंपनी दिखाकर निवेश माँगना और करोड़ों लेकर भागना
- साइबर धोखाधड़ी — OTP लेकर बैंक अकाउंट खाली करना
- फर्जी मैरिज स्कैम — शादी का झाँसा देकर गहने और पैसे ले जाना
- फर्जी मेडिकल ट्रीटमेंट — नकली इलाज के नाम पर लाखों रुपये लेना
- फर्जी लॉटरी स्कैम — “1 करोड़ जीता है” कहकर पहले कुछ हजार माँगना
- फर्जी बिजनेस पार्टनरशिप — पार्टनर बनाने के नाम पर लाखों लेकर दुकान बंद करना
- फर्जी टिकट स्कैम — नकली रेलवे या एयरलाइन टिकट बेचकर पैसे हड़पना
ध्यान रखो — अगर नुकसान छोटा हो तो 318(1) या 318(2) लगती है। बड़े नुकसान पर ही 318(4) लगती है।
सजा की पूरी डिटेल (तालिका)
318(4) BNS में fraud punishment in India काफी सख्त है। अधिकतम 7 साल की कैद और जुर्माना — दोनों एक साथ हो सकते हैं। सेशन कोर्ट ट्रायल होता है और ये गैर-जमानती अपराध है। कोर्ट नुकसान की रकम देखकर जुर्माना तय करता है — कई मामलों में ये लाखों तक जाता है।
| धारा | अपराध | अधिकतम सजा | जमानत | पुरानी IPC |
| 318(1) BNS | साधारण धोखाधड़ी | 3 साल + जुर्माना | हाँ | 417 IPC |
| 318(2) BNS | संपत्ति हड़पना | 5 साल + जुर्माना | कभी-कभी | 420 IPC (छोटा) |
| 318(3) BNS | धोखा + जानलेवा खतरा | 7 साल + जुर्माना | नहीं | 420 + अन्य |
| 318(4) BNS | बड़ा नुकसान पहुँचाना | 7 साल + जुर्माना | नहीं | 420 IPC |
| 318(4) + 109 | धोखे के लिए उकसाना | मुख्य अपराध जितनी | नहीं | 420 + 109 |
BNS vs IPC 420 difference सिर्फ नाम और भाषा का है — सजा और गंभीरता लगभग एक जैसी है। BNS में परिभाषा को और साफ किया गया है।
जमानत मिलना बहुत मुश्किल क्यों?
318(4) BNS एक गैर-जमानती अपराध है — यानी थाने से जमानत नहीं मिलती। सेशन कोर्ट में आवेदन देना पड़ता है और वो भी अक्सर रद्द हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है कि बड़े financial scam law के मामलों में जमानत बहुत सोच-समझकर दी जानी चाहिए।
अगर आरोपी पहले से फरार हो, उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड हो, या नुकसान करोड़ों में हो — तो जमानत लगभग नामुमकिन है। cheating case bail process में हाई कोर्ट तक जाना पड़ सकता है। और अगर वहाँ भी नहीं मिली, तो सुप्रीम कोर्ट आखिरी रास्ता बचता है।
असल जिंदगी में धारा 318(4) BNS (पुरानी 420 IPC) के बड़े केस

भारत में कई बड़े financial fraud legal cases में यही धारा लगाई गई है। इन मामलों ने पूरे देश को हिला दिया और लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद की। हर केस में एक चीज़ कॉमन थी — जानबूझकर धोखा और बड़ा नुकसान।
- Nirav Modi PNB Scam — फर्जी Letter of Undertaking से हजारों करोड़ का बैंक फ्रॉड केस
- Sahara Scam — फर्जी बॉन्ड बेचकर करोड़ों रुपये जुटाए — 318(4) BNS + अन्य धाराएँ
- Speak Asia Scam — ऑनलाइन फर्जी सर्वे के नाम पर investment scam India का बड़ा मामला
- Saradha Chit Fund Scam — फर्जी चिट फंड से हजारों लोगों का पैसा हड़पा
- Ajmer Property Scam — property cheating case जिसमें फर्जी डीड से जमीन बेची गई
इन केसों ने साबित किया कि BNS cheating law सिर्फ कागज पर नहीं — असल में भी काम करता है।
धारा 318(4) BNS का दुरुपयोग कैसे होता है?
हर कानून का दुरुपयोग हो सकता है — और 318(4) BNS भी इससे अछूती नहीं है। कई बार पुरानी रंजिश में या व्यापारिक विवाद को आपराधिक रंग देने के लिए झूठी FIR दर्ज करवाई जाती है। छोटी रकम के मामले में भी ये धारा लगा दी जाती है जबकि कानूनी तौर पर वो 318(1) का मामला होता है।
criminal breach of trust और cheating में फर्क होता है — लेकिन कई बार दोनों को मिला-जुलाकर गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। अगर तुम्हें लगे कि FIR झूठी है, तो 482 CrPC के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हो। सबूत और इरादा — दोनों साबित न हों तो केस अपने आप कमज़ोर पड़ जाता है।
अगर तुम पर धारा 318(4) BNS लग गई हो तो क्या करोगे? (स्टेप-बाय-स्टेप)
घबराओ मत — लेकिन देर भी मत करो। fraud case lawyer India से तुरंत मिलना सबसे पहला और सबसे ज़रूरी कदम है। एक अच्छा वकील पहले FIR पढ़ेगा, सबूत देखेगा और तुम्हें सही रास्ता दिखाएगा।
इन स्टेप्स को ध्यान से फॉलो करो:
- तुरंत क्रिमिनल वकील लो — बिना वकील के कोई बयान मत दो
- सभी सबूत इकट्ठा करो — बैंक स्टेटमेंट, मैसेज, एग्रीमेंट, रसीदें
- इरादा साफ करो — साबित करो कि धोखाधड़ी का कोई इरादा नहीं था
- सेशन कोर्ट में जमानत आवेदन दो — सबूतों के साथ
- अगर सेशन कोर्ट मना करे — हाई कोर्ट जाओ
- झूठी FIR हो तो — 482 CrPC के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करो
- ट्रायल के दौरान — हर पेशी पर हाज़िर रहो, गवाहों की तैयारी करो
अगर किसी ने तुम्हें धोखा दिया हो तो क्या करोगे?
धोखाधड़ी साबित कैसे होती है — ये सवाल हर पीड़ित के मन में होता है। जवाब सीधा है — सबूत। जितने मज़बूत सबूत, उतना मज़बूत केस। ऑनलाइन फ्रॉड की कानूनी कार्रवाई के लिए cyber fraud complaint India में ऑनलाइन भी दर्ज हो सकती है — cybercrime.gov.in पर।
property fraud FIR कैसे करें या किसी भी fraud FIR process के लिए ये स्टेप्स फॉलो करो:
- सभी सबूत सँभालो — WhatsApp चैट, बैंक ट्रांसफर, एग्रीमेंट, गवाह
- थाने में FIR दर्ज करवाओ — 318(4) BNS + संबंधित धाराएँ लिखवाओ
- पुलिस न सुने तो — मजिस्ट्रेट के पास सीधे शिकायत दो
- पैसे वापस चाहिए तो — सिविल कोर्ट में भी केस दायर करो
- financial fraud legal remedy के लिए वकील की मदद लो
Conclusion
धारा 318(4) BNS कोई मामूली धारा नहीं है। ये उन लोगों के लिए है जो जानबूझकर दूसरों को धोखा देकर बड़ा नुकसान पहुँचाते हैं — और कानून ऐसे लोगों को 7 साल तक की कैद दे सकता है। IPC 420 replaced by BNS के बाद भी इस धारा की सख्ती में कोई कमी नहीं आई है।
चाहे तुम पीड़ित हो या आरोपी — दोनों के लिए सबसे ज़रूरी है सही जानकारी और सही वकील। सबूत इकट्ठा करो, समय पर कदम उठाओ और कानून पर भरोसा रखो।
FAQ’s
धारा 318(4) BNS क्या है?
ये धारा उन लोगों पर लगती है जो जानबूझकर धोखा देकर किसी को बड़ा नुकसान पहुँचाते हैं। पहले ये IPC 420 के नाम से जानी जाती थी — अब BNS में 318(4) हो गई है।
धारा 318(4) BNS में कितनी सजा मिलती है?
इस धारा में अधिकतम 7 साल की कैद और जुर्माना दोनों एक साथ हो सकते हैं। ज़्यादातर मामलों में कोर्ट 3 से 5 साल की सजा सुनाता है।
धारा 318(4) BNS जमानती है या गैर-जमानती?
ये पूरी तरह गैर-जमानती अपराध है — थाने से जमानत नहीं मिलती। सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट में आवेदन देना पड़ता है।
धारा 318(4) और 318(1) में क्या फर्क है?
318(1) साधारण धोखाधड़ी है जिसमें 3 साल तक की सजा मिलती है। 318(4) बड़े नुकसान वाली धोखाधड़ी है जिसमें 7 साल तक की कैद हो सकती है।
धारा 318(4) BNS में compounding हो सकती है?
नहीं — ये गैर-समझौता योग्य अपराध है इसलिए दोनों पक्ष आपस में समझौता करके केस बंद नहीं कर सकते। कोर्ट को ही फैसला सुनाना पड़ता है।
धारा 318(4) BNS में जमानत मिल सकती है?
बहुत रेयर मामलों में हाई कोर्ट से जमानत मिलती है — वो भी तब जब नुकसान छोटा हो या सबूत कमज़ोर हों। आमतौर पर जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है।
धारा 318(4) BNS में FIR कैसे फाइल करें?
नज़दीकी थाने में जाकर धोखाधड़ी के सबूत — बैंक ट्रांसफर, मैसेज, एग्रीमेंट — के साथ FIR दर्ज करवाओ। ऑनलाइन फ्रॉड हो तो cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हो।
धारा 318(4) BNS में कितने साल की सजा मिलती है?
कानूनन अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि कोर्ट नुकसान की गंभीरता और सबूतों के आधार पर सजा तय करता है।
धारा 318(4) BNS में जुर्माना कितना लगता है?
जुर्माने की कोई तय सीमा नहीं है — कोर्ट नुकसान की रकम देखकर फैसला करता है। बड़े फ्रॉड केस में ये लाखों से करोड़ों तक जा सकता है।
धारा 318(4) BNS का दुरुपयोग कैसे रोकें?
अगर FIR झूठी हो तो 482 CrPC के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करो। धोखे का इरादा और नुकसान — दोनों साबित न हों तो केस अपने आप कमज़ोर पड़ जाता है।
धारा 318(4) BNS में ट्रायल कितने समय में होता है?
ट्रायल सेशन कोर्ट में होता है और आमतौर पर 2 से 5 साल तक चल सकता है। गवाहों की संख्या और सबूतों की जटिलता के हिसाब से समय कम या ज़्यादा हो सकता है।